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​UP में प्रॉपर्टी का बढ़ेगा दायरा, लखनऊ-नोएडा समेत 6 जिलों में 4,724 बनेंगे नए घर

उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर का दायरा बढ़ने वाला है. राज्य के 6 जिलों में 13 नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. इन प्रोजेक्ट्स के जरिए कुल 4,724 रेजिडेंशियल और कमर्शियल यूनिट्स तैयार की जाएंगी. इन प्रोजेक्ट्स में करीब 2,380.04 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी UP RERA ने इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है.

​UP में प्रॉपर्टी का बढ़ेगा दायरा, लखनऊ-नोएडा समेत 6 जिलों में 4,724 बनेंगे नए घर

जिन जिलों में इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, उनमें बाराबंकी, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और आगरा शामिल हैं. खास बात यह है कि इन जिलों में प्रॉपर्टी प्रोजेक्ट्स के लिहाज से अलगअलग तस्वीर देखने को मिली है. निवेश के मामले में बाराबंकी सबसे आगे है, जबकि नई यूनिट्स की संख्या के मामले में लखनऊ ने बाजी मारी है.

2,380 करोड़ रुपये का निवेश

UP RERA के मुताबिक, इन 13 प्रोजेक्ट्स में कुल 2,380.04 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इसमें सबसे ज्यादा निवेश बाराबंकी में होने वाला है. लखनऊ से सटे इस जिले में दो रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. इन दोनों प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत 751.42 करोड़ रुपये है. इनके तहत कुल 591 रेजिडेंशियल यूनिट्स विकसित की जाएंगी.

बाराबंकी में हो रहा यह निवेश इसलिए भी अहम है क्योंकि यह जिला लखनऊ के करीब है और राजधानी क्षेत्र के आसपास बढ़ती रियल एस्टेट गतिविधियों का फायदा इसे भी मिल रहा है. शहरों में जमीन और प्रॉपर्टी की बढ़ती मांग के बीच आसपास के इलाकों में भी हाउसिंग और कमर्शियल डेवलपमेंट का विस्तार हो रहा है.

लखनऊ में सबसे ज्यादा यूनिट्स

नई यूनिट्स की संख्या के मामले में लखनऊ सबसे आगे है. राजधानी में एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है. इस प्रोजेक्ट में करीब 385.76 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इसके तहत 1,392 यूनिट्स तैयार की जाएंगी. यानी अकेले लखनऊ के इस एक प्रोजेक्ट में कुल स्वीकृत 4,724 यूनिट्स का बड़ा हिस्सा शामिल है. राजधानी में लगातार बढ़ती आबादी, रोजगार के अवसर और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के बीच रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की मांग बनी हुई है. ऐसे में नए प्रोजेक्ट्स के आने से घरों की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है.

वाराणसी में 3 प्रोजेक्ट्स, 1,189 यूनिट्स

वाराणसी भी नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के मामले में प्रमुख शहरों में शामिल है. यहां तीन रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. इनकी अनुमानित लागत 750.24 करोड़ रुपये है. इन तीनों प्रोजेक्ट्स में कुल 1,189 यूनिट्स तैयार की जाएंगी. इस तरह निवेश के लिहाज से वाराणसी और बाराबंकी लगभग बराबर स्तर पर हैं. वाराणसी में धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के साथसाथ शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे बदलावों ने भी रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा दिया है. नए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स से शहर में आवासीय विकल्पों का विस्तार होने की उम्मीद है.

गाजियाबाद में कमर्शियल प्रोजेक्ट्स भी

NCR से जुड़े गाजियाबाद में भी तीन नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. इनमें दो कमर्शियल और एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट शामिल है. इन प्रोजेक्ट्स में करीब 286.27 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इनसे कुल 864 यूनिट्स तैयार होंगी. गाजियाबाद दिल्लीNCR का अहम हिस्सा है. दिल्ली के आसपास बढ़ती रियल एस्टेट डिमांड का असर गाजियाबाद पर भी पड़ता है. ऐसे में कमर्शियल और रेजिडेंशियल दोनों तरह के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने से यहां प्रॉपर्टी मार्केट की गतिविधियां बढ़ सकती हैं.

नोएडा समेत गौतम बुद्ध नगर में 564 यूनिट्स

गौतम बुद्ध नगर, जिसमें नोएडा शामिल है, में दो प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है. इनमें एक रेजिडेंशियल और एक कमर्शियल प्रोजेक्ट है. दोनों में करीब 186 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इनके जरिए कुल 564 यूनिट्स विकसित की जाएंगी. नोएडा पहले से ही उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े रियल एस्टेट और कमर्शियल हब में शामिल है. यहां आईटी, कॉरपोरेट, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश के साथ रेजिडेंशियल डिमांड भी बढ़ी है. ऐसे में नए प्रोजेक्ट्स से प्रॉपर्टी सेक्टर की गतिविधियों को और गति मिल सकती है.

आगरा में 124 यूनिट्स की तैयारी

आगरा में दो रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. इन दोनों प्रोजेक्ट्स में कुल 20.35 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इनके तहत 124 यूनिट्स तैयार की जाएंगी. अन्य जिलों के मुकाबले आगरा में प्रस्तावित निवेश काफी कम है, लेकिन यहां भी नए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलना स्थानीय स्तर पर हाउसिंग सप्लाई बढ़ाने की दिशा में अहम है.

रोजगार और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को भी फायदा

UP RERA का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स से सिर्फ रियल एस्टेट सेक्टर को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे जुड़े कई दूसरे सेक्टरों में भी गतिविधियां बढ़ेंगी. प्रोजेक्ट्स के निर्माण के दौरान सीमेंट, स्टील, ईंट, इलेक्ट्रिकल सामान, सैनिटरी उत्पाद और दूसरे कंस्ट्रक्शन मटेरियल की मांग बढ़ सकती है. इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन और दूसरी सर्विसेज में भी काम बढ़ने की उम्मीद है. इससे स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. UP RERA के मुताबिक, 2,380.04 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश राज्य में कंस्ट्रक्शन गतिविधियों को बढ़ाने में मदद करेगा. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सपोर्ट मिलने की उम्मीद है.

क्यों बढ़ रहा है रियल एस्टेट का दायरा?

UP RERA ने रियल एस्टेट गतिविधियों में बढ़ोतरी के पीछे राज्य सरकार की निवेशअनुकूल नीतियों और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की कोशिशों को भी एक वजह बताया है. अथॉरिटी के मुताबिक, हाउसिंग, अर्बन डेवलपमेंट और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है. रेगुलेटर का फोकस सिर्फ नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने तक सीमित नहीं है. होमबायर्स के हितों की सुरक्षा और रियल एस्टेट सेक्टर में उनका भरोसा मजबूत करना भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है.

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