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​अमेरिका की सख्ती के बाद भी क्या भारत खरीदेगा रूसी तेल? यहां फंसा है मामला

अमेरिकी संसद ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का रास्ता साफ कर दिया है. नए कानून के तहत अमेरिका ऐसे देशों के सामान पर 100% तक एक्स्ट्रा टैरिफ लगा सकता है. भारत के लिए यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा रूसी कच्चे तेल से पूरा कर रहा है.

​अमेरिका की सख्ती के बाद भी क्या भारत खरीदेगा रूसी तेल? यहां फंसा है मामला

अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद नया कानून लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के मुताबिक, इसके बाद अमेरिका तय कर सकता है कि किन देशों को इस कानून के तहत निशाना बनाया जाए और उनके खिलाफ कितना टैरिफ लगाया जाएगा.

बातचीत के लिए समय दे सकता है अमेरिका

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को खरीदारी घटाने और बातचीत के लिए 180 दिन का समय दे सकता है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति इस समय को कम भी कर सकते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रंप के साइन करते ही भारत के सामान पर सीधे 100% टैरिफ लग जाएगा. 100% सिर्फ अधिकतम सीमा है. असल टैरिफ कितना होगा, किन सामानों पर लगेगा और कब से लागू होगा, यह अमेरिकी प्रशासन तय करेगा.

भारतअमेरिका ट्रेड डील पर भी असर

इस कानून का समय भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है. ऐसे में रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा इन बातचीत में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी कह चुके हैं कि भारत ट्रेड डील को अंतिम रूप देने से पहले टैरिफ में फायदा चाहता है. रूसी तेल को लेकर नया खतरा ऐसे समय आया है जब भारत पहले से अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है. खबर के मुताबिक, भारत के ज्यादातर अमेरिकी आयातों पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लागू है.

रूस से भारत कितना तेल खरीद रहा है?

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता रूसी तेल पर उसकी बढ़ती निर्भरता है. GTRI के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 51.1% थी. जुलाई में भारत ने रूस से करीब 7.27 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जबकि कुल क्रूड आयात 14.21 अरब डॉलर का था. इसके मुकाबले UAE की हिस्सेदारी 10.8%, सऊदी अरब की 9.6%, वेनेजुएला की 6.3%, ब्राजील की 5.5%, ओमान की 5.3% और अमेरिका की 2.9% थी. यानी अकेले रूस से भारत ने इन छह देशों से मिलाकर खरीदे गए तेल से भी ज्यादा कच्चा तेल खरीदा.

दिलचस्प बात ये है कि 2022 से पहले भारत के कुल सालाना तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 3% थी. यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच रूसी क्रूड सस्ता हुआ और भारतीय रिफाइनरियों ने इसकी खरीद बढ़ा दी. इसके बाद रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन गया.

क्या भारत को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा?

नए कानून में भारत को सीधे रूसी तेल खरीदना बंद करने का आदेश नहीं है. इसके बजाय अमेरिका को ऐसे देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता है, जो रूस से ऊर्जा खरीदना जारी रखते हैं. GTRI के मुताबिक, अगर रूसी तेल के दाम कम रहते हैं तो भारत सस्ते तेल के फायदे को देखते हुए खरीद जारी रख सकता है.

फिलहाल भारत पर अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका कितना टैरिफ लगाता है, किन उत्पादों को इसके दायरे में रखता है और इसे कब लागू करता है. वहीं, अगर कुछ उत्पादों को छूट मिलती है या सीमित सामान पर शुल्क लगाया जाता है तो भारत का जोखिम कम हो सकता है.

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