
प्रयागराज, अमृत विचार। प्रयागराज नगर निगम के एक शिलापट्ट पर दर्ज विवरण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नैनी के पुराने यमुना पुल पर नई स्ट्रीट लाइट के लोकार्पण के लिए लगाए गए शिलापट्ट में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को शहर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र का विधायक बताया गया है।
यह जानकारी सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और शिलापट्ट की प्रूफ रीडिंग को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। केशव प्रसाद मौर्य वर्तमान में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं। यूपी विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें उपमुख्यमंत्री के रूप में दर्ज किया गया है। वहीं, प्रयागराज की शहर पश्चिमी विधानसभा सीट से सिद्धार्थ नाथ सिंह विधायक हैं।
शिलापट्ट पर पद और विधानसभा को लेकर चूक
नैनी के पुराने यमुना पुल पर स्ट्रीट लाइट के लोकार्पण के लिए लगाए गए शिलापट्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा समेत अन्य नाम दर्ज हैं। इसी शिलापट्ट पर केशव प्रसाद मौर्य के नाम के साथ उन्हें शहर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र का विधायक बताया गया है। मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि शिलापट्ट तैयार होने से पहले संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी जांच और प्रूफ रीडिंग की गई थी या नहीं।
17 लाख रुपये की लागत से हुआ है लाइटिंग का काम
पुराने यमुना पुल पर नगर निगम की ओर से करीब 17 लाख रुपये की लागत से नई लाइटिंग कराई गई है। बुधवार को महापौर गणेश केसरवानी ने इसका लोकार्पण किया था। इस दौरान नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। नगर निगम के मुताबिक, नई रोशनी से पुराने यमुना पुल का रात का दृश्य बेहतर होने के साथ राहगीरों को भी सुविधा मिलेगी।
जिम्मेदार अधिकारियों पर उठ रहे सवाल
शिलापट्ट पर जनप्रतिनिधि के पद और विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी जानकारी गलत दर्ज होने के बाद संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा यह भी है कि शिलापट्ट तैयार करने, उसकी सामग्री की जांच करने और उसे अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया में आखिर चूक कहां हुई। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि गलत विवरण वाले शिलापट्ट को हटाकर सही जानकारी के साथ नया शिलापट्ट लगाया जाए। साथ ही गलती के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जाए।


