
लखनऊ, अमृत विचार: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों के संदिग्ध और अधूरे रिकॉर्ड के सत्यापन को लेकर प्रदेश सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। कृषि विभाग ने प्रदेश में लंबित 15,35,858 मामलों का शतप्रतिशत सत्यापन और डाटा शुद्धीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सितंबर के अंत तक माइक्रोप्लान तैयार कर चल रहे फार्मर रजिस्ट्री अभियान के साथ समन्वय करने को कहा गया है।
कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रविन्द्र ने शुक्रवार को जारी शासनादेश में सख्त निर्देश दिए हैं कि समय से सत्यापन नहीं होने पर आगामी किस्त जारी होने से पहले संबंधित प्रकरण निरस्त हो सकते हैं। जिससे पात्र किसान भी योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं। प्रमुख सचिव के मुताबिक सबसे अधिक 10,19,117 मामले पिछले भूमि स्वामी की अधूरी पहचान से जुड़े हैं। इसके अलावा 2,74,742 मामलों में विरासत के अलावा अन्य कारण से म्यूटेशन, जबकि 2,41,999 मामलों में पूर्व और वर्तमान भूमि स्वामी दोनों का डाटा दर्ज है।
सितंबर के अंत तक तैयार होगा माइक्रोप्लान
इनके अतिरिक्त 8,422 संदिग्ध नाबालिग डाटा और 31,133 ऐसे मामले हैं, जिनमें एक ही परिवार के सदस्यों के लाभार्थी होने का संदेह है। शासन ने 202223 और 202324 के पांच प्रतिशत भौतिक सत्यापन के लिए चयनित गांवों के 3,70,069 लाभार्थियों का सत्यापन 30 सितंबर तक पूरा कर पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा ओपन सोर्स के 64,528 मामले, संदिग्ध नाबालिग और समान परिवार के सदस्यों से जुड़े मामलों का भी तत्काल निस्तारण करने को कहा गया है।



