BusinessIndia

​62% Gen-Z कर रहे रिटायरमेंट के इन्वेस्ट, तो 70% जल्दी काम से पाना चाहते हैं छुट्टी! क्या है इसकी वजह?

आज की युवा पीढ़ी रिटायरमेंट को लेकर पहले से प्लानिंग शुरू कर रही है. जेन जी 29 साल की उम्र से ही रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू कर दे रहे हैं, लेकिन जल्दी नौकरी छोड़ने की चाहत और उसके लिए जरूरी पैसे के बीच बड़ा गैप भी दिख रहा है. एक्सिस मैक्स लाइफ की IRIS 6.0 रिपोर्ट के मुताबिक 70% शहरी भारतीय अगर उनकी आर्थिक जरूरतें पूरी हो जाएं तो तय उम्र से पहले रिटायर होना चाहते हैं. इनमें से आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले FIRE यानी फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस एंड रिटायर अर्ली हासिल करना चाहते हैं. वहीं, 62% GenZ ने रिटायरमेंट के लिए इन्वेस्टमेंट शुरू कर दिया है. आइए डिटेल में समझते हैं कि अर्ली रिटायरमेंट प्लालिंग को लेकर यह रिपोर्ट क्याक्या बताती है.

​62% Gen-Z कर रहे रिटायरमेंट के इन्वेस्ट, तो 70% जल्दी काम से पाना चाहते हैं छुट्टी! क्या है इसकी वजह?

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाईअगस्त 2026 के दौरान 40 शहरों के 4,134 परिवारों में 25 से 65 साल के कामकाजी लोगों से बात की गई. इससे पता चलता है कि लोगों में जल्दी रिटायर होने की चाहत बढ़ रही है. हर दो में से एक शहरी भारतीय मानता है कि पहली सैलरी मिलते ही रिटायरमेंट की प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए, लेकिन यहां एक बड़ा गैप भी है. 61% लोगों को पता है कि रिटायरमेंट के लिए उन्हें कितना पैसा चाहिए, फिर भी सिर्फ 11% को भरोसा है कि उनके पास इतना फंड है जो पूरी जिंदगी चल सके. महंगाई, बढ़ते खर्च और रिटायरमेंट के बाद लंबे समय तक चलने वाले खर्चों की वजह से पर्याप्त कॉर्पस जुटाना चुनौती बना हुआ है.

प्लानिंग की सोच जल्दी

औसतन लोग मानते हैं कि रिटायरमेंट सेविंग के बारे में 31 साल की उम्र से सोचना शुरू कर देना चाहिए. GenZ में यह उम्र 29 साल है, जबकि मिलेनियल्स में 31 और Gen X+ में 34 साल है. यह सोच इन्वेस्टमेंट में भी दिख रही है. 62% GenZ रिटायरमेंट के लिए इन्वेस्टमेंट शुरू कर चुके हैं. वहीं, मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 70% और Gen X+ में 75% है. यानी युवा उम्र में रिटायरमेंट के बारे में सोच रहे हैं और शुरुआत भी कर रहे हैं, लेकिन बड़ी उम्र की पीढ़ियों के मुकाबले अभी कम GenZ ने इन्वेस्टमेंट शुरू किया है.

नंबर पता है पर कॉर्पस नहीं बना

रिटायरमेंट के लिए कितना पैसा चाहिए, इसका अंदाजा होना अलग बात है और उतना पैसा जमा कर पाना अलग. 61% लोगों को पता है कि रिटायरमेंट के बाद अपनी मौजूदा लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए उन्हें कितना कॉर्पस चाहिए, लेकिन सिर्फ 11% लोगों को भरोसा है कि उनका जमा पैसा पूरी जिंदगी चलेगा. वहीं, 39% लोगों को लगता है कि उनका फंड रिटायरमेंट के बाद पांच साल भी नहीं चल पाएगा. यानी लोगों को यह तो पता है कि कितना पैसा चाहिए, लेकिन उस रकम को जमा करने में बड़ा गैप है. इसके लिए सिर्फ प्लानिंग नहीं, बल्कि रेगुलर और पर्याप्त इन्वेस्टमेंट भी जरूरी है.

‘एक करोड़’ अब काफी नहीं लगता

रिटायरमेंट के बाद आराम से जिंदगी चलाने के लिए 1 करोड़ रुपये या उससे कम रकम को पर्याप्त मानने वाले लोगों का हिस्सा 2025 में 77% था, जो 2026 में घटकर 70% रह गया. यानी अब ज्यादा लोग मान रहे हैं कि रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड चाहिए. 15 लाख रुपये से ज्यादा सालाना कमाने वाले परिवारों में सिर्फ 51% लोग 1 करोड़ रुपये या उससे कम को पर्याप्त मानते हैं, जबकि मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 63% है. रिटायरमेंट के करीब पहुंच रहे लोगों के लिए यह गैप और बड़ा सवाल बन जाता है.

Gen X+ के 91% लोगों को अफसोस है कि उन्होंने रिटायरमेंट के लिए इन्वेस्टमेंट जल्दी शुरू नहीं किया. वहीं, 82% को लगता है कि स्टेबल इनकम के लिए उन्हें आगे भी काम करना पड़ सकता है. Axis Max Life के MD और CEO सुमित मदान के मुताबिक, रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ नौकरी छोड़ना नहीं है, बल्कि इतनी आर्थिक आजादी हासिल करना है कि आगे काम करना आपकी जरूरत नहीं, आपकी पसंद हो.

सिर्फ पैसे का सवाल नहीं

रिटायरमेंट प्लानिंग में सिर्फ पैसे ही नहीं, हेल्थ को भी अहम माना जा रहा है. 75% लोगों को उम्मीद है कि रिटायरमेंट के बाद वे हेल्दी और फिट रहेंगे, जबकि 52% लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस है. रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोगों में 44% रोजाना एक्सरसाइज या दूसरी एक्टिविटी करते हैं. वहीं, 21% लोग वेयरेबल डिवाइस की मदद से अपनी हेल्थ ट्रैक करते हैं. फैमिली भी रिटायरमेंट प्लान का अहम हिस्सा है. 87% लोग उम्मीद करते हैं कि रिटायरमेंट के बाद वे अपने बच्चों के साथ रहेंगे. हालांकि, फैमिली और सोसाइटी से सपोर्ट मिलने का भरोसा 87% से घटकर 84% रह गया है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply