
लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के लारी कार्डियोलॉजी में दिल के मरीजों की जांच कराने की राह आसान नहीं है। मरीजों को दिल की जांच के लिए 49 दिन के बाद की तारीख मिल रही है। ऐसे में मरीज जांच के लिए भटक रहे हैं।
गंभीर मरीजों की भी तत्काल जांच नहीं हो पा रही है। उन्हें भी 24 घंटे बाद का समय दिया जा रहा है। इससे मरीजों का समय पर सही इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है। यहां 2डीईको जांच के लिए काफी समय से वेटिंग चली आ रही है। जिम्मेदारों की हीलाहवाली से मरीजों को दिक्कतों का सामान करना पड़ रहा है।
लारी कार्डियोलॉजी में पूरे प्रदेश से हृदय रोगी इलाज के लिए आते हैं। यहां ओपीडी में रोजाना करीब 400 मरीज देखे जाते हैं। इसके आलावा इमरजेंसी का भी 24 घंटे संचालन होता है।
लखीमपुर के रहने वाले 60 वर्षीय सर्वेश को चिकित्सकों ने दिल की बीमारी की आशंका जाहिर की। उन्हें लारी कॉर्डियोलॉजी की ओपीडी में दिखाने की सलाह दी। वह बेटे के साथ शनिवार सुबह करीब पांच बजे लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग पहुंचे। दोपहर एक बजे जैसे तैसे चिकित्सक को दिखा पाए। बीमारी का पता लगाने के लिए चिकित्सकों ने 2डीईको जांच लिखी। जांच के लिए उन्हें 7 नवंबर की तारीख दी गई। बेटे ने कर्मचारी से जल्दी की तारीख देने की गुजारिश की। इसके बावजूद कर्मचारी ने मरीज की एक भी नहीं सुनी। मरीज का कहना था कि इतने दिनों बाद जांच होने से उसकी बीमारी और बढ़ जाएगी।
इसी तरह मरीज संजय ने चिकित्सक को ओपीडी में दिखाया। डॉक्टर ने 2डीईको जांच लिखी। परिजन काउंटर पर जांच के लिए डेट लेने पहुंचे तो उन्हें भी 7 नवंबर को जांच के लिए बुलाया गया। परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत ठीक नहीं है। जांच की जरूरत है। यहां पर डेढ़ माह बाद की तारीख दी गई है।
इसलिए होती है टूडीईको जांच
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल के मरीजों के लिए 2डीईको जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसकी मदद से हार्ट का फंक्शन, वाल्व या ऊतकों में कोई खराबी, जन्मजात दिल की बीमारी, कोरोनरी धमनी रोगों आदि की सही जानकारी मिल पाती है, जिसकी मदद से आगे का इलाज तय किया जाता है। साथ ही लारी में इसकी जांच महज 500 रूपये में हो जाती है। जबकि निजी केंद्रों पर 1500 से लेकर 2500 रुपये तक देने पड़ते हैं।
अन्य जांचों के लिए भी लंबा इंतजार
केजीएमयू में एमआरआई, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांचों के लिए भी लंबी वेटिंग है। जिससे गंभीर मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। लाहीमपुर के रहने वाले सुनील कुमार के गले में परेशानी है। उन्होंने शनिवार को केजीएमयू की ओपीडी में दिखाया था। चिकित्सक ने एमआरआई कराने की सलाह दी। सुनील के मुताबिक उन्हें जांच के लिए 25 सितंबर की तारीख दी गई है। उन्होंने इसके लिए 4800 रुपये का शुल्क भी जमा कर दिया है। वहीं मरीज पुष्कर जायसवाल ने पेट में परेशानी होने पर शनिवार को ओपीडी में दिखाया था। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। पुष्कर के मुताबिक उन्हें छह छह नवंबर की तारीख दी गई।
तारीख निकल जाने पर नई तारीख देने से इंकार
मरीज सुमन का क्वीन मेरी से इलाज चल रहा है। सुमन का कहना है की एक माह पहले उन्हें चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। काउण्टर से उसे 15 सितंबर की तारीख मिली थी। लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने के चलते वह 15 सितंबर को जांच के लिए नहीं आ सकी। शनिवार को आने पर उसकी जांच नहीं की गई। साथ ही नई तारीख देने से भी मना कर दिया गया।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके. सिंह मरीजों का दबाव अधिक और जांच सस्ती होने के कारण लोड ज्यादा रहता है, जिसमें रेफरल केस भी सबसे ज्यादा होते हैं। इसके बावजूद पूरी क्षमता के साथ मरीजों की जांच की जा रही है। गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है।
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