पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और जियो पॉलिटिकल अनिश्चितता का सीधा असर अब भारत के इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर दिखने लगा है. देश में नेशनल हाईवे के निर्माण से जुड़ी प्रमुख संस्था नेशनल हाईवेज बिल्डर्स फेडरेशन ने केंद्र सरकार से सड़क निर्माण से जुड़े विशेष राहत उपायों की समयसीमा को 3 महीने और बढ़ाने की मांग की है. बिल्डर्स का कहना है कि ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों और कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण कई हाईवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी हो रही है.

पश्चिम एशिया संकट के कारण सड़क निर्माण के सबसे मुख्य कच्चे माल यानी बिटुमेन और फ्यूल के दामों में भारी उतारचढ़ाव देखा जा रहा है. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में जारी तनाव की वजह से मालभाड़ा बढ़ गया है और शिपिंग में देरी से निर्माण सामग्री समय पर प्रोजेक्ट साइट्स तक नहीं पहुंच पा रही है. इन बड़ी व्यावहारिक और वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए NHBF ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से राहत उपायों को आगे बढ़ाने की गुहार लगाई है, ताकि निर्माण कंपनियों को पैसों के संकट और समय सीमा बीतने पर लगने वाले पेनल्टी या जुर्माने से बचाया जा सके.
NHBF का तर्क
नेशनल हाईवेज बिल्डर्स फेडरेशन की ओर से कहा गया है कि ठेकेदारों और कन्सेशनरीज को असामान्य फाइनेंशियल और ऑपरेशनल संबंधी दबावों का सामना करना पड़ रहा है जो उनके कंट्रोल से बाहर हैं. एसोसिएशन ने सरकार से राहत उपायों की अवधि को और तीन महीने यानी दिसंबर के अंत तक, या मौजूदा असामान्य बाजार स्थितियों के काफी हद तक स्थिर होने तक बढ़ाने का अनुरोध किया. NHBF ने तर्क दिया कि मौजूदा राहत उपायों को 30 सितंबर से बंद करने से, जबकि मूल परिस्थितियां काफी हद तक वैसी ही बनी हुई हैं, चल रहे प्रोजेक्ट्स पर भारी फाइनेंशियल प्रेशर पड़ सकता है.
ठेकेदारों और कन्सेशनरीज को मिलेगा भरोसा
नेशनल हाईवेज बिल्डर्स फेडरेशन ने कहा कि इससे प्रोजेक्ट के कैश फ्लो और काम पूरा करने पर बुरा असर पड़ सकता है, खासकर उन प्रोजेक्ट्स पर जो पहले से ही कम मार्जिन पर चल रहे हैं, और इससे ऐसे दावे, विवाद और देरी भी हो सकती है जिनसे बचा जा सकता था. NHBF ने कहा कि इस छूट से ठेकेदारों और कन्सेशनरीज को अनिश्चितता के दौर में भी प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रखने के लिए जरूरी भरोसा मिलेगा. इसमें आगे कहा गया कि इससे चल रहे कॉन्ट्रैक्ट्स की वित्तीय व्यवहार्यता में भी मदद मिलेगी, कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े ऐसे विवाद कम होंगे जिनसे बचा जा सकता था और महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में आसानी होगी.


