
बरेलीः नियमित पेट साफ होना स्वस्थ पाचन की पहली सीढ़ी है। आयुर्वेद में शरीर के स्वास्थ्य में पाचन तंत्र को विशेष महत्व दिया गया है। जब मल का त्याग नियमित रूप से न हो, मल कठोर हो जाए, शौच के समय अधिक जोर लगाना पड़े या शौच के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का अनुभव हो, तो इसे सामान्य भाषा में कब्ज और आयुर्वेद में मलबद्धता या कोष्ठबद्धता कहा जाता है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में कब्ज एक बहुत सामान्य समस्या बन गई है। अनियमित खानपान, कम पानी पीना, भोजन में रेशे की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव, तनाव और देर रात तक जागने जैसी आदतें इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। आयुर्वेद में पाचन तंत्र और विशेष रूप से अपान वायु के संतुलन को मल त्याग से जोड़ा गया है। इसलिए कब्ज को केवल एक छोटीमोटी समस्या मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
पेट साफ रहना क्यों जरूरी है?
लगातार कब्ज रहने पर पेट में गैस, पेट फूलना, असहजता, भूख कम लगना और शौच के दौरान अधिक जोर लगाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक जोर लगाने से बवासीर या गुदा में दरार जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए नियमित और सहज मल त्याग स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शरीर के संकेतों को समझिए
कब्ज आज बहुत सामान्य समस्या बन चुकी है। बुजुर्गों में उम्र, कम शारीरिक गतिविधि और बदलती पाचन क्षमता इसके कारण बन सकते हैं, वहीं युवाओं में अनियमित खानपान, कम पानी पीना, फाइबर की कमी, घंटों बैठे रहना और शौच की इच्छा को रोकने की आदत इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। कब्ज को अक्सर लोग छोटीसी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब कब्ज बारबार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह केवल शौच की परेशानी नहीं रहती। इससे गुदा, मलाशय और बड़ी आंत पर प्रभाव पड़ सकता है तथा कुछ परिस्थितियों में गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कब्ज को कैंसर का सामान्य कारण नहीं माना जाता, लेकिन कुछ कैंसर, विशेषकर बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर, में शौच की आदत में नया और लगातार बदलाव दिखाई दे सकता है। इसलिए कब्ज को समझना और उसके चेतावनी संकेतों को पहचानना आवश्यक है।
कब्ज से होने वाली प्रमुख समस्याएं और जटिलताएं
बवासीर लगातार कब्ज में कठोर मल निकालने के लिए जोर लगाने से गुदा की नसों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे बवासीर की समस्या हो सकती है और दर्द, खुजली या रक्तस्राव हो सकता है।
गुदा फिशर/एनल फिशर कठोर और सूखा मल गुदा की त्वचा में चीर पैदा कर सकता है। इसे Anal Fissure कहते हैं। इसमें शौच के समय तेज दर्द और कभीकभी खून आ सकता है।
मल का फंस जाना लंबे समय तक कब्ज रहने पर बहुत कठोर मल मलाशय या बड़ी आंत में जमा होकर फंस सकता है। इसे Fecal Impaction कहा जाता है। यह गंभीर स्थिति बन सकती है।
मल का रिसाव कभीकभी फंसे हुए कठोर मल के आसपास से पतला मल बाहर निकलने लगता है। व्यक्ति को लगता है कि दस्त हो रहे हैं, जबकि अंदर कठोर मल जमा हो सकता है।
मलाशय का बाहर आना/रेक्टल प्रोलैप्स लंबे समय तक बारबार जोर लगाने से कुछ लोगों में मलाशय के बाहर आने की समस्या हो सकती है।
गुदा में दर्द और जलन कठोर मल, फिशर और लगातार जोर लगाने से गुदा में दर्द, जलन व असहजता हो सकती है।
अधूरा शौच कब्ज में कई लोगों को शौच करने के बाद भी ऐसा महसूस होता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ।
बड़ी आंत पर प्रभाव लंबे समय की गंभीर कब्ज में बड़ी आंत भी प्रभावित हो सकती है।
दीर्घकालिक कब्ज़/कॉन्स्टिपेशन जब कब्ज लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे दीर्घकालिक या क्रॉनिक कब्ज कहा जाता है।
मेगाकोलन गंभीर और लंबे समय की कुछ स्थितियों में बड़ी आंत असामान्य रूप से फैल सकती है। इसे Megacolon कहा जाता है।
स्टेरकोरल अल्सर बहुत अधिक कठोर मल लंबे समय तक आंत की दीवार पर दबाव डालता रहे, तो कुछ परिस्थितियों में Stercoral Ulcer बन सकता है।
डायवर्टिकुलोसिस बड़ी आंत की दीवार में छोटीछोटी थैलियां बनने की स्थिति को डायवर्टिकुलोसिस कहते हैं। कब्ज और जोर लगाने का इससे संबंध हो सकता है। हालांकि इसे केवल कब्ज का परिणाम कहना सही नहीं होगा।
डायवर्टिकुलर रोग इन थैलियों से संबंधित बीमारी में पेट दर्द और अन्य पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
वोल्वुलस कुछ परिस्थितियों में आंत का एक हिस्सा मुड़ सकता है और रुकावट पैदा कर सकता है। इसे Volvulus कहते हैं। यह गंभीर स्थिति है। पुरानी कब्ज व्यक्ति के शारीरिक आराम और मानसिक संतुष्टि दोनों को प्रभावित कर सकती है।
क्या कब्ज से कैंसर हो सकता है
कभीकभी कैंसर स्वयं कब्ज या शौच की आदत में बदलाव का कारण बन सकता है।
विशेषकर बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर में व्यक्ति को पहले की तुलना में शौच की आदत में नया और लगातार बदलाव दिखाई दे सकता है।
पार्किन्सन रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, स्ट्रोक आदि जैसी कुछ स्थितियों में भी कब्ज हो सकती है। ऐसी स्थिति में मल बहुत कठोर होकर जमा हो सकता है और कभीकभी गंभीर रुकावट या अन्य जटिलताएं पैदा कर सकता है।
इसलिए गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति में कई दिनों तक शौच न होना, पेट का अत्यधिक फूलना, उल्टी, तेज पेट दर्द या गैस भी न निकलना जैसी स्थिति को सामान्य कब्ज समझकर घर पर छोड़ना उचित नहीं है।
विशेषकर उम्र बढ़ने के बाद पहली बार शुरू हुई लगातार कब्ज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब्ज कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे हर बार केवल एक चूर्ण या दवा लेकर दबा
दिया जाए।
कभी कब्ज केवल जीवनशैली की समस्या होती है, कभी यह बवासीर या फिशर जैसी जटिलता पैदा कर सकती है और कभीकभी कब्ज किसी दूसरी बीमारी का संकेत भी हो सकती है।
भोजन में बढ़ाएं रेशे की मात्रा
कब्ज से बचाव के लिए भोजन में पर्याप्त फाइबर यानी आहार रेशा महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, सलाद और अन्य प्राकृतिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। आंबला, सेब, अमरूद, नाशपाती, पपीता, संतरा जैसे फल तथा हरी सब्जियां और साबुत अनाज पाचन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं। फाइबर की मात्रा अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरेधीरे बढ़ानी चाहिए और साथ में पर्याप्त पानी भी लेना चाहिए। ऐसा न करने पर कुछ लोगों में गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है। तला, अत्यधिक प्रसंस्कृत और फाइबर की कमी वाला भोजन नियमित रूप से लेने से बचना चाहिए। भोजन में विविधता और संतुलन रखना स्वस्थ पाचन के लिए आवश्यक है।
शारीरिक गतिविधि भी जरूरी
आज की जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना, मोबाइल और कंप्यूटर का अधिक उपयोग तथा शारीरिक गतिविधि की कमी आम हो गई है। नियमित शारीरिक गतिविधि आंतों की सामान्य गति को बनाए रखने में मदद करती है। प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना, हल्का व्यायाम या योग करना उपयोगी होता है। सुबह की दिनचर्या में थोड़ी शारीरिक गतिविधि शामिल करना कब्ज से बचाव के लिए अच्छा कदम है। हालांकि किसी गंभीर बीमारी, गर्भावस्था या अन्य विशेष स्वास्थ्य स्थिति में व्यायाम का चुनाव चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना चाहिए।
शौच की इच्छा को न रोकें
कई लोग काम की व्यस्तता या सार्वजनिक स्थान पर शौचालय की सुविधा न होने के कारण शौच की इच्छा को बारबार रोकते रहते हैं। ऐसी आदत को नियमित बनाना उचित नहीं है। शरीर जब शौच का संकेत दे तो संभव हो तो समय पर शौचालय जाना चाहिए।
तनाव और नींद का भी असर
पाचन स्वास्थ्य का संबंध केवल भोजन से नहीं है। पर्याप्त नींद, तनाव कम करने के उपाय और नियमित जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। रात में देर तक मोबाइल चलाना, अनियमित समय पर भोजन करना और लगातार तनाव में रहना शरीर की सामान्य दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। योग, प्राणायाम, ध्यान और पर्याप्त विश्राम जैसी आदतें समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होती हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
हर कब्ज कैंसर नहीं है, लेकिन हर नई, लगातार और असामान्य कब्ज को केवल सामान्य कब्ज मानना भी सही नहीं है। अपने शरीर के संकेतों को समझिए, समय पर ध्यान दीजिए और आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय जांच कराइए। हर कब्ज का इलाज घरेलू उपायों से करना उचित नहीं है। यदि कब्ज लगातार बनी हुई है, बारबार लौटती है या इसके साथ मल में खून, अचानक वजन कम होना, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, बहुत अधिक कमजोरी, पेट में अत्यधिक सूजन या मल त्याग में गंभीर कठिनाई हो तो चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। विशेष रूप से उम्र बढ़ने के बाद अचानक शुरू हुई कब्ज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ दवाइयां और कई चिकित्सकीय स्थितियां भी कब्ज का कारण बन सकती हैं। इसलिए लंबे समय तक समस्या रहने पर कारण की जांच जरूरी है। कब्ज को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि इसे डरने या घबराने की नहीं, बल्कि समझने और सही तरीके से संभालने की जरूरत है। घरेलू उपाय हल्की और कभीकभार होने वाली समस्या में सहायक हो सकते हैं, लेकिन लगातार या गंभीर कब्ज में विशेषज्ञ की सलाह ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, बरेली में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से रोगी की प्रकृति, खानपान, दिनचर्या और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित परामर्श दिया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा कब्ज, गैस, अपच और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं में आहारविहार, योग एवं आवश्यक आयुर्वेदिक उपचार के बारे में मार्गदर्शन किया जाता है। संस्था का उद्देश्य लोगों को केवल बीमारी होने के बाद उपचार लेने के बजाय रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। लोगों को पर्याप्त पानी पीने, फाइबर युक्त संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, भोजन को अच्छी तरह चबाने और समय पर शौच की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाता है। संस्था की ओर से आमजन को यह संदेश दिया जाता है कि लंबे समय से बनी हुई कब्ज को नजरअंदाज न करें और आवश्यकता पड़ने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
रोहिलखंड आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय सेक्टर 7, डोहरा रोड बरेली 8077808309
डॉ. नीलम गुप्ता, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रचना शारीर, रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, बरेली
- लोकदर्पण
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