
लखनऊ। समाजवादी पार्टी की लखनऊ में हुई बैठक में एटा और कासगंज के नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर सियासत गरमा गई है। इसी घटनाक्रम को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओपी राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। राजभर ने बैठक में नेताओं के आपस में भिड़ने और इसके बाद एटाकासगंज की पार्टी इकाइयों को भंग किए जाने का हवाला देते हुए सपा के संगठन और अनुशासन पर सवाल उठाए।
अखिलेश के सामने भिड़े सपा नेता
दरअसल, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर लखनऊ में सपा की बैठक बुलाई गई थी। इसमें एटा और कासगंज के करीब 250 वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल हुए थे। बैठक के दौरान सपा नेता मंजीत यादव और एटा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और दोनों के बीच तीखी नोकझोंक की स्थिति बन गई।
बैठक छोड़कर चले गए अखिलेश
विवाद बढ़ने पर अखिलेश यादव ने नेताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत दी। रिपोर्टों के मुताबिक, नाराजगी के बीच वह बैठक से चले गए। इसके करीब एक घंटे बाद एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणियों के साथ दोनों जिलों के फ्रंटल संगठनों को भी भंग कर दिया गया।
राजभर बोले ‘सपा में अनुशासन का हाल एक जैसा’
ओपी राजभर ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अखिलेश यादव पर हमला बोला। राजभर के मुताबिक, “सपा की बैठक में कुश्ती हो गई।” उन्होंने सपा के PDA को लेकर तंज कसते हुए कहा कि उनके हिसाब से PDA का मतलब “पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई” है।
राजभर ने दावा किया कि सपा में अनुशासन की स्थिति एक जैसी है और कहा कि अगर चुनाव जीतना है तो प्रदेश इकाई को भी भंग कर देना चाहिए।
एटाकासगंज इकाइयां भंग होने के बाद बढ़ी सियासी चर्चा
बैठक के बाद दोनों जिलों की संगठनात्मक इकाइयों को भंग किए जाने से सपा के भीतर भी चर्चा तेज हुई है। पार्टी की ओर से नए सिरे से जिला संगठन गठित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। यह घटनाक्रम 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सामने आया है।
ओपी राजभर के बयान के बाद अब यह मामला सपा और उसके राजनीतिक विरोधियों के बीच बयानबाजी का नया मुद्दा बन गया है।



