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​Bank Strike: 28 सितंबर से कामकाज ठप करने की तैयारी, सरकार बोली- बातचीत से हल निकालें कर्मचारी

Bank Strike: बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल को लेकर वित्त मंत्रालय ने बड़ा बयान दिया है. मंत्रालय ने बैंक यूनियनों से कामकाज बंद न करने और बाकी बचे मसलों को बातचीत के जरिए सुलझाने का अनुरोध किया है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 5 दिन के वर्किंग वीक समेत कई मांगों को लेकर 28 सितंबर से तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. इस पर सरकार ने साफ किया है कि कर्मचारियों की ज्यादातर मुख्य मांगों पर पहले ही सकारात्मक कदम उठाए जा चुके हैं, ऐसे में हड़ताल से किसी का फायदा नहीं होगा.

​Bank Strike: 28 सितंबर से कामकाज ठप करने की तैयारी, सरकार बोली- बातचीत से हल निकालें कर्मचारी

पांच दिन तक ठप हो सकता है कामकाज

अगर ये हड़ताल होती है, तो देश भर में बैंकिंग सेवाओं पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है. 28 सितंबर से पहले वीकेंड की छुट्टियां हैं, जिसके चलते लगातार पांच दिन तक शाखाएं बंद रहने की नौबत आ सकती है. सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि हड़ताल का समय बैंकों की हाफ इयरली क्लोजिंग यानी 30 सितंबर से टकरा रहा है. ये तारीख खातों के मिलान, प्रोविजनिंग, ट्रेजरी और मार्केट ऑपरेशंस के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है. इस समय पर कामकाज रुकने से आम ग्राहकों, छोटेबड़े कारोबारियों और सरकारी लेनदेन को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी.

कर्मचारियों के हित में सरकार के बड़े कदम

वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ हैं. कर्मचारियों के योगदान को समझते हुए सरकार ने उनके हित में कई बड़े फैसले लिए हैं. सभी स्तर के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की गई है. नया पेस्केल लागू किया गया है और स्टाफ वेलफेयर फंड का दायरा बढ़ाया गया है. इसके अलावा असिस्टेंट जनरल मैनेजर से लेकर चीफ जनरल मैनेजर तक के उच्च पदों की संख्या बढ़ाई गई है. सरकार ने कर्मचारियों की मांग मानते हुए विवादित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम को भी बातचीत के बाद स्थगित कर दिया था.

समय से पहले नए समझौते की तैयारी

मंत्रालय ने ये भी बताया कि बैंक कर्मचारियों के वेतन रिवीजन और भत्तों से जुड़े नए द्विपक्षीय समझौते पर बातचीत इतिहास में पहली बार समय से काफी पहले शुरू कर दी गई है. इसका लक्ष्य नवंबर 2027 की डेडलाइन से बहुत पहले ही प्रक्रिया को पूरा करना है. ये दिखाता है कि सरकार बैंककर्मियों की समस्याओं को लेकर कितनी गंभीर है. सरकार का कहना है कि हड़ताल से न केवल आम जनता परेशान होती है, बल्कि बैंकों के कारोबार और खुद कर्मचारियों के हितों को भी नुकसान पहुंचता है.

शनिवार की छुट्टी पर क्या है सरकार का रुख

5 दिन की बैंकिंग की मांग पर सरकार ने स्पष्ट किया कि बाकी शनिवार आम नागरिकों के लिए बैंक शाखाओं तक पहुंचने का बेहद अहम जरिया हैं. देश का हर वर्ग अपनी रोजाना की जरूरतों के लिए बैंकिंग सेवाओं पर निर्भर रहता है. ऐसे में सरकार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे आंदोलन का रास्ता छोड़कर सकारात्मक बातचीत करें, ताकि देश की बैंकिंग व्यवस्था बिना किसी रुकावट के चलती रहे.

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