
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान मशीन बनकर रह गया है। सुखसुविधाएं तो बढ़ रही हैं, पर मानसिक शांति और सेहत कहीं पीछे छूटती जा रही है। लोगों में हर काम जल्दी करने और आगे निकलने की होड़ मची हुई है। अपनों के लिए समय का अभाव है, वहीं दफ्तरों में काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। असमय खानपान और अधूरी नींद के कारण लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इस बिगड़ी जीवनशैली में खुद को स्वस्थ बनाए रखना है, तो योग का अभ्यास जरूरी हो गया है। योग का प्रचारप्रसार केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है। सरकार लगातार योग को बढ़ावा दे रही है, लेकिन योग पर विदेशी संस्कृति का प्रभाव भी बढ़ रहा है। भारतीय संस्कृति के इस पारंपरिक योग को नएनए नाम देकर पेश किया जा रहा है। इनमें कुछ प्रयोग आधुनिक जीवन में उपयोगी हैं, जबकि कुछ सेहत को लाभ पहुंचाने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
आत्मा, मन और शरीर को जोड़ता है योग
योग केवल कसरत नहीं है, बल्कि आत्मा, मन और शरीर को एक सूत्र में पिरोने का प्राचीन भारतीय विज्ञान है। यह मानसिक विचारों को शांत कर मन और शरीर में सामंजस्य स्थापित करता है। योग की खोज किसी एक व्यक्ति ने नहीं की, बल्कि यह हजारों साल पुरानी भारतीय संस्कृति की सामूहिक धरोहर है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को आदियोगी यानी योग का जनक माना जाता है, जबकि महर्षि पतंजलि को योग को व्यवस्थित रूप देने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने योगसूत्र की रचना की और अष्टांग योग को व्यवस्थित स्वरूप दिया। महाभारत युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता में कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग के रूप में योग का व्यवहारिक ज्ञान दिया।
डिजिटल युग में प्राचीन योग को आधुनिक बनाने के नाम पर इसके विभिन्न रूपों का प्रचार हो रहा है। ‘कॉरपोरेट योगा’ के रूप में बड़ीबड़ी कंपनियों में योग कराया जा रहा है। गुड़गांव, दिल्ली, नोएडा, अहमदाबाद समेत महानगरों में इसका प्रचलन बढ़ा है। इनमें ‘चेयर योगा’ के साथ ‘रोप योगा’, ‘बाल योगा’ और ‘बीयर योगा’ जैसे प्रयोग भी शामिल हैं।
चेयर योग तो सही, बाकी विदेशी बदलाव से हो रहे नुकसान
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सेतवान का कहना है कि पारंपरिक योग पर पश्चिमी देशों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इसका असर ‘कॉरपोरेट योगा’ के बढ़ते चलन के रूप में भी दिखाई दे रहा है। नामचीन कंपनियों में कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए योग प्रशिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं। इनमें ‘चेयर योग’ भी कराया जाता है, जिसमें काम के दौरान कुर्सी पर बैठकर योग के विभिन्न आसन किए जाते हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में सेवा से पहले वह कई कंपनियों में ‘चेयर योग’ का अभ्यास करा चुके हैं। यह योग कुछ हद तक सही है, लेकिन अन्य नामों से भी योग के प्रयोग बढ़ रहे हैं। इनमें पारंपरिक योग जैसा प्रभाव न होने के कारण लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। योग का अभ्यास प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
योग समग्र विकास का प्रभावी माध्यम
बलरामपुर अस्पताल के योग विशेषज्ञ डॉ. नंदलाल यादव का कहना है कि योग मानव जीवन के समग्र विकास का प्रभावी माध्यम है। आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधानों ने इसके स्वास्थ्य लाभों को प्रमाणित किया है। बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा और अनुसंधान के विस्तार के कारण योग का भविष्य उज्ज्वल है। रोजगार, उद्यमिता, शोध और चिकित्सा के क्षेत्र में योग असीम संभावनाएं प्रदान करता है। युवाओं के लिए योग न केवल स्वस्थ जीवन का आधार है, बल्कि सम्मानजनक और समृद्ध करियर का भी सशक्त माध्यम बन सकता है।
चार समय में कर सकते हैं योगासन
सुबह खाली पेट योगासन करना सही है, लेकिन व्यस्त जीवन में लोग दोपहर, शाम और रात्रि में भी योगासन कर सकते हैं। योग शास्त्र में इसके लिए चार विकल्प बताए गए हैं। खाली पेट, खाना खाने से एक घंटे पहले या भोजन के चार घंटे बाद योगासन किया जा सकता है। योग करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति और चिकित्सकीय सलाह का ध्यान रखना जरूरी है।
अप्राकृतिक जीवन के प्रभाव को किया जा सकता है कम
लोगों को निरोगी रहने के लिए प्राकृतिक जीवनशैली अपनानी चाहिए। यानी दिन में काम और रात्रि में विश्राम, लेकिन आधुनिक समय में लोग अलगअलग पालियों में कार्य कर रहे हैं। इससे शारीरिक और मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। मधुमेह, उच्च और निम्न रक्तचाप, सर्वाइकल, मानसिक तनाव और एंग्जाइटी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। ऐसे में योग का अभ्यास जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने और रोगों से बचाव में मदद कर सकता है।
हर योग के बाद करें थोड़ा विश्राम
लोग योग के प्रति जागरूक तो हुए हैं, लेकिन ऑफिस जाने की जल्दी में शीघ्रता से सभी आसन करते हैं। जबकि हर आसन के बाद कुछ पल आराम की जरूरत होती है। तभी योग का पूरा लाभ मिल पाता है। ऑफिस में कार्य करने वाले लोगों के लिए नियमित योग जरूरी है।
स्क्रीन टाइम करें कम
आजकल ज्यादातर लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। रील देखने की आदत से एकाग्रता प्रभावित हो रही है और याददाश्त से जुड़ी समस्याओं की शिकायतें बढ़ रही हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर स्क्रीन टाइम कम करने की जरूरत है। इसके साथ सूक्ष्म क्रियाएं की जा सकती हैं। गर्दन के लिए ग्रीवा संचालन और आंखों को आराम देने के लिए चक्षु संचालन किया जा सकता है। युवाओं के साथ हर व्यक्ति को सोशल मीडिया की लत से दूर रहना चाहिए।
योग के क्षेत्र में बना सकते हैं करियर
बरेली स्थित रुहेलखंड विश्वविद्यालय में योग में परास्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रम कराया जा रहा है। युवा से लेकर किसी भी उम्र का व्यक्ति यह पाठ्यक्रम कर अपना करियर बना सकता है। यहां अभी बीएससी योग और एमए योग पाठ्यक्रम नहीं है, हालांकि इनकी मांग हो रही है। विश्वविद्यालय में विभिन्न सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने भी इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया है।
योग में खेल के क्षेत्र में भी करियर
योग में खेल के क्षेत्र में भी करियर की संभावनाएं बढ़ी हैं। योगासन स्पोर्ट्स के जरिए खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिल रहा है। विश्व योगासन चैंपियनशिप जैसे आयोजनों से इसे वैश्विक मंच मिला है। योगासन खेल प्रतियोगिताओं को आर्टिस्टिक योगासन, रिदमिक योगासन और पारंपरिक योगासन जैसी श्रेणियों में बांटा गया है।
योग शिक्षा के लिए प्रमुख पाठ्यक्रम
डिप्लोमा इन योग
बीएससी/बीए योग
एमएससी/एमए योग
पीजी डिप्लोमा इन योग थेरेपी
पीएचडी इन योगिक साइंस
प्रमुख योगासन
सूर्यवेदी प्राणायाम: यह कम रक्तचाप की समस्या दूर करता है। वातनाशक होने के कारण दर्द को दूर करता है। पेट के कृमि को नष्ट करने का काम काम करता है।
उज्जायी प्राणायाम: कफ नाशक होने के कारण कफ संबंधी रोगों को दूर करता है। दमा, अस्थमा, गले की खराश, हर तरह की थायराइड संबंधी रोग, घेंघा रोग को दूर करता है।
शीतकारी प्राणायाम: यह शीतलता प्रदान करता है। चर्म रोग को दूर करता है। त्वचा के दागधब्बे दूर करता है। चेहरे पर चमक लाता है।
शीतली प्राणायाम: यह भूख व प्यास दोनों को संतुलित करता है। शरीर की अतिरिक्त गर्मी को दूर करता है। शीतलता प्रदान करता है।
भस्त्रिका प्राणायाम: यह वात, पित्त व कफ को संतुलित करता है। उच्च रक्तचाप व दिल की बीमारी को दूर करता है।
भ्रामरी प्राणायाम: मन को स्थिर करता है। मानसिक रोगों को दूर करता है।



