
रायबरेली, अमृत विचार। शहर में रात के अंधेरे में कई दुकानों के अचानक हटाये जाने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया। मिलएरिया थाना क्षेत्र के मलिकमऊ चौराहे पर एनएचआई की जमीन पर टीन शेड डालकर संचालित की जा रही कई दुकानें कथित तौर पर जेसीबी से हटवा दी गईं। इसमें दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें बिना पर्याप्त सूचना दिए रातोंरात दुकानें हटाकर वहां से उनका सामान और टीन शेड गायब कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि चौराहे पर स्थित इन दुकानों से कई लोग करीब दो दशक से अपना और अपने परिवार की जीविका चला रहे थे। लंबे समय से कारोबार कर रहे दुकानदारों के सामने अब रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। दुकानें हटाए जाने की पूरी कार्रवाई आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद होने की बात सामने आई है। फुटेज में कथित तौर पर जेसीबी मशीन से दुकानों को हटाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर किसके निर्देश पर और किस अधिकार के तहत इन दुकानों को रात के समय हटाया गया।
दुकानदारों का आरोप है कि पास में स्थित एक निजी हॉस्पिटल की पार्किंग तैयार कराने के लिए इन दुकानों को हटवाया गया। इस कार्रवाई के पीछे पास के ही एक व्यक्ति की भूमिका होने का भी आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
दुकानदारों का कहना है कि वर्षों से दुकानें चलाकर परिवार का भरणपोषण कर रहे थे। अचानक दुकानें हटा दिए जाने से उनका कारोबार पूरी तरह चौपट हो गया। यदि जमीन एनएचआईकी थी और वहां दुकानें अवैध रूप से संचालित हो रही थीं तो नियमानुसार कार्रवाई और पूर्व सूचना की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई, यह भी सवालों के घेरे में है।
मामला सामने आने के बाद अब दुकानदारों ने पूरे घटनाक्रम की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह स्पष्ट हो सकता है कि दुकानें कब, किसकी मौजूदगी में और किसके निर्देश पर हटाई गईं। अब निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
दुकान हटाने से पहले रोज पहुंचता था सिपाही, कार्रवाई की भनक पहले से थी?
मलिकमऊ चौराहे पर रातोंरात दुकानें हटाए जाने के मामले में एक सिपाही की भूमिका को लेकर भी दुकानदारों ने सवाल उठाए हैं। दुकानदारों का कहना है कि कथित तौर पर पिछले दोतीन दिनों से एक सिपाही रोज उनके पास पहुंच रहा था और दुकानें हटाने की बात कह रहा था। दुकानदारों का आरोप है कि सिपाही दुकानदारों से कहता था कि वे अपनी दुकानें खुद हटा लें। इसके बाद रात में जेसीबी से दुकानें हटाए जाने की कार्रवाई सामने आई। इससे दुकानदारों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या दुकान हटाए जाने की कार्रवाई की जानकारी पुलिस को पहले से थी?
हालांकि सिपाही की भूमिका और दुकानदारों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उसने किस अधिकारी या किस आदेश के तहत दुकानदारों को दुकान हटाने के लिए कहा था। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से ही यह साफ हो सकेगा कि दुकानें हटाने की कार्रवाई में किसी पुलिसकर्मी की कोई भूमिका थी या नहीं।
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