भारत के पेंट बाजार में इन दिनों जबरदस्त खींचतान मची है. बिड़ला ग्रुप के ‘बिड़ला ओपस’ के साथ जेएसडब्ल्यू पेंट्स की एंट्री ने इस सेक्टर में प्राइस वॉर छेड़ दी है. इन बड़े घरानों की सीधी चुनौती का सामना देश की दूसरी सबसे बड़ी पेंट कंपनी बर्जर पेंट्स कर रही है. फिलहाल पेंट मार्केट के 50 फीसदी से ज्यादा हिस्से पर एशियन पेंट्स का कब्जा है. इसके बाद करीब 20 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बर्जर पेंट्स का नाम आता है. लेकिन नए प्रतिद्वंद्वियों के भारी डिस्काउंट वाले खेल ने बर्जर को बैकफुट पर ला दिया है. इस साल कंपनी के शेयरों में 16 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है. अब इस चुनौती से निपटने के लिए कंपनी के सीईओ अभिजीत रॉय ने एक आक्रामक रणनीति तैयार की है.

बर्जर पेंट्स का नया मास्टरप्लान
सीईओ अभिजीत रॉय ने इसे एक तरह का ‘इंसर्जेंट एक्ट’ करार दिया है. कंपनी ने तय किया है कि वो उन बाजारों में अपनी टीम को मजबूत करेगी जहां उसकी पकड़ थोड़ी कमजोर है. इनमें पश्चिम में मुंबईपुणे के साथ दक्षिण में चेन्नईबेंगलुरु जैसे शहर शामिल हैं. इसके अलावा कंपनी लग्जरी पेंट्स की एक नई रेंज लॉन्च करने जा रही है. डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है. टारगेट है कि हर साल करीब 250 नए एक्सक्लूसिव आउटलेट खोले जाएं, ताकि मार्च 2029 तक इनकी संख्या 2500 तक पहुंच जाए.
बिक्री को रफ्तार देने के लिए पेंटर्स, बिल्डर्स के साथ आर्किटेक्ट्स को भी खास इंसेंटिव दिए जा रहे हैं. कंपनी पश्चिम बंगाल के साथ ओडिशा में नए प्लांट लगाने के लिए 2000 करोड़ रुपये का निवेश भी कर रही है, जिनका काम 20292030 तक पूरा होगा.
विजय माल्या के हाथों से निकली कंपनी
आज 5.5 अरब डॉलर की वैल्यू वाली इस कंपनी पर ढींगरा परिवार का कंट्रोल है. कुलदीप सिंह ढींगरा के साथ उनके भाई गुरबचन सिंह ढींगरा के पास कंपनी की 64.56 फीसदी हिस्सेदारी है. दिलचस्प बात ये है कि दोनों भाइयों ने 1991 में ये बिजनेस शराब कारोबारी विजय माल्या से खरीदा था. किंगफिशर एयरलाइंस के डूबने के बाद माल्या की स्थिति किसी से छिपी नहीं है, लेकिन उनके हाथों से निकलकर बर्जर ने पेंट सेक्टर में अपना एक अलग मुकाम बनाया है.
प्राइस वॉर से मुनाफे पर सीधा असर
बाजार में नए खिलाड़ियों के आने से प्राइसिंग का भारी दबाव बन गया है. इसके चलते एशियन पेंट्स के साथ बर्जर पेंट्स का प्रॉफिट मार्जिन भी कम हुआ है. वहीं मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है. सीईओ रॉय का कहना है कि मौजूदा हालात में अपना 20 फीसदी मार्केट शेयर बनाए रखना ही अपने आप में एक बड़ा बेसलाइन परफॉर्मेंस है. अगर बाजार के हालात उनके प्लान के हिसाब से रहे, तो वे देशभर में 0.5 प्रतिशत की अतिरिक्त ग्रोथ हासिल करने की कोशिश करेंगे.
त्योहारी सीजन से बंपर बिक्री की उम्मीद
त्योहारी सीजन को लेकर कंपनी काफी पॉजिटिव है. रॉय को उम्मीद है कि नवंबर में दिवाली के आसपास मांग में तेजी आएगी. शुरुआती सुस्ती के साथ कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कंपनी इस साल 8 प्रतिशत की वॉल्यूम ग्रोथ हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. देश भर में तेजी से हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के काम से भी इंडस्ट्रियल पेंट सेगमेंट को काफी फायदा मिलने की उम्मीद है. एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2030 तक भारत का पेंट सेक्टर 5 प्रतिशत की दर से बढ़कर 11.8 बिलियन डॉलर का हो जाएगा.



