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एमपी का दतला पहाड़ बनेगा इंटरनेशनल टूरिज्म हब, 100 करोड़ से चमकेगा इलाका… ट्रेकिंग ट्रेल्स की भी होंगी सुविधाएं

एमपी का दतला पहाड़ बनेगा इंटरनेशनल टूरिज्म हब, 100 करोड़ से चमकेगा इलाका... ट्रेकिंग ट्रेल्स की भी होंगी सुविधाएं

एमपी पर्यटन विकास बोर्ड.

विश्व प्रसिद्ध खजुराहो मंदिरों की ऐतिहासिक पहचान के साथ अब छतरपुर जिले को पर्यटन के क्षेत्र में एक नई और बड़ी सौगात मिलने जा रही है. राजनगर तहसील के अंतर्गत चितरई गांव स्थित दतला पहाड़ को मध्य प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर के मल्टी-टूरिज्म और वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा. इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल खजुराहो आने वाले पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

परियोजना के लिए करीब 70 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है. इस पर लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य प्रस्तावित है. योजना को डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (DBFOT) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा. इसके लिए निजी निवेशकों से प्रस्ताव मांगे गए हैं. चयनित कंपनी को जमीन 90 वर्षों की लीज पर दी जाएगी और पूरे प्रोजेक्ट को पांच वर्ष की निर्धारित समय-सीमा में पूरा करना होगा.

विकसित होंगी आधुनिक और प्रकृति आधारित सुविधाएं

परियोजना के अंतर्गत वेलनेस रिसॉर्ट, ईको-फ्रेंडली कॉटेज, योग एवं ध्यान केंद्र, एडवेंचर टूरिज्म गतिविधियां, ट्रेकिंग ट्रेल्स और नेचर वॉक जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके साथ ही पर्यटकों के ठहराव को बढ़ाने और उन्हें प्रकृति के बीच शांत वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष फोकस किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खजुराहो, ओरछा और पन्ना टाइगर रिजर्व को जोड़ते हुए एक नया टूरिज्म कॉरिडोर विकसित होगा, जो प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक अलग पहचान बनाएगा.

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ

इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी सेवाएं, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प व्यवसाय और ग्रामीण रोजगार से जुड़े लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से लाभ मिलने की संभावना है. बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे युवाओं के पलायन पर भी रोक लग सकती है.

प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का संगम

दतला पहाड़ खजुराहो मंदिर समूह से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. क्वार्ट्ज पत्थरों से बनी यह पहाड़ी श्रृंखला घिसे हुए दांतों जैसी दिखाई देती है, जिसके कारण इसे दतला या दांतला पहाड़ कहा जाता है. यह स्थान ट्रेकिंग, नेचर वॉक और सूर्यास्त के मनोहारी दृश्य के लिए पहले से ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है.

यहां कई छोटे प्राचीन मंदिर और तीर्थ स्थल मौजूद हैं. पहाड़ की चोटी पर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस पहाड़ का नाम दतला नामक एक राक्षस के नाम पर पड़ा था, जो कभी इस क्षेत्र में निवास करता था.

पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार

दतला पहाड़ का विकास छतरपुर जिले के लिए पर्यटन के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. खजुराहो की ऐतिहासिक विरासत के साथ आधुनिक वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म को जोड़कर यह परियोजना प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाएगी.

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