
अमृत विचार, लखनऊ : डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के शौचालय में नवजात का शव मिलने की सूचना देने वाले सफाईकर्मियों को ही पीटा गया है। पीटने का आरोप सहायक सुरक्षा अधिकारियों डॉ. राजेश कुमार यादव और सुरजीत सिंह पर लगा है। हालांकि संस्थान प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए समिति का गठन कर दिया है। साथ ही सहायक सुरक्षा अधिकारियों डॉ. राजेश कुमार यादव और सुरजीत सिंह को काम करने से रोक दिया गया है।
कमरा नंबर 16 बना टॉर्चर रूम, 5 घंटे तक रखा बंधक
दरअसल, सोमवार को अस्पताल के शौचालय में एक नवजात बच्चे का शव मिला था, जिसकी सूचना रामचन्दर और मोहन ने अधिकारियों को दी। आरोप है कि इसके बाद सुरजीत सिंह और राजेश यादव ने दोनों को कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा और पीटा भी। मोहन ने पुलिस को दी तहरीर में कहा है कि प्रशासनिक भवन स्थित 16 नम्बर कमरे में लातघूंसों और प्लास्टिक के पाइप से उनकी बेरहमी से पिटाई की गई है। इतना ही नहीं जातिसूचक गालियां देते हुए नौकरी से निकालने की धमकी दी और जबरन वीडियो भी बनवाया गया है।
आक्रोशित कर्मचारियों ने शुरू किया प्रदर्शन
मंगलवार सुबह जैसी ही घटना की जानकारी अन्य कर्मचारियों को हुई वह आक्रोशित हो उठे, करीब 400 सफाईकर्मियों और यूनियन के पदाधिकारियों ने संस्थान में कामकाज ठप कर दिया। इतना ही नहीं देखते ही देखते जोरदार प्रदर्शन भी शुरू हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम. सिंह ने सुरजीत सिंह और राजेश यादव को काम करने से रोक दिया है।
CMS का नाम लेकर करते थे उत्पीड़न का खेल
कर्मचारियों का आरोप है कि जिस अधिकारी सुरजीत सिंह को काम से रोका गया है वह पहले ही रिटायर्ड हो चुके हैं, लोहिया संस्थान में वह संविदा पर तैनात हैं। कर्मचारियों ने मंगलवार को सीएमएस से मुलाकात कर बताया कि आरोपित अधिकारी सुरजीत सिंह खुद को आपका का ) खास बताते थे। आईकार्ड, ड्रेस और पर्चा बनवाने जैसी छोटीछोटी बातों पर वे कर्मचारियों को डरातेधमकाते थे। कमरा नंबर 16 को उन्होंने टॉर्चर रूम बना रखा था, जहां पहले भी कई कर्मचारियों की पिटाई की जा चुकी थी और झूठे आरोप लगाकर कई को नौकरी से निकाला जा चुका था।
डायरेक्टर ने लिया कड़ा एक्शन
मंगलवार सुबह 8 बजे जब 400 से अधिक सफाईकर्मी लामबंद होकर धरने पर बैठ गए, तो अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गईं। आरोप है कि शुरुआत में CMS डॉ. विक्रम सिंह ने मामले को दबाने की कोशिश की और कर्मचारियों को ही धमकाया। मामला बढ़ता देख संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम. सिंह ने खुद कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने बिना देर किए आरोपित अधिकारियों को काम करने से रोक दिया है।

