गुरुवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयर ना सिर्फ बीएसई पर लिस्ट होंगे. बल्कि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया पर भी लिस्ट होंगे. MSE ने बुधवार को जारी एक सर्कुलर में कहा कि NSE के इक्विटी शेयरों को 24 सितंबर से एक्सचेंज के कैपिटल मार्केट सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए शामिल किया जाएगा. मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज, SEBI से मान्यता प्राप्त एक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है जो कैपिटल मार्केट, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और डेट सेगमेंट में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है. इसका प्लेटफॉर्म इक्विटी और इंडेक्स डेरिवेटिव्स, डेट और करेंसी डेरिवेटिव्स तक फैला हुआ है, जिसमें 250 से ज्यादा लिस्टिंग और ट्रेडिंग के लिए 3100 से ज्यादा कंपनियां उपलब्ध हैं.

ये फैसला NSE के MD और CEO आशीष चौहान के उस स्पष्टीकरण के कुछ दिनों बाद लिया गया जिसमें जिसमें उन्होंने कहा था कि स्टॉक एक्सचेंज अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग के लिए SEBI की मंजूरी नहीं लेगा. मार्केट रेगुलेटर के नियम अभी किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपनी सिक्योरिटीज को लिस्ट करने की अनुमति नहीं देते हैं. NSE के शेयरों की ट्रेडिंग कल BSE और MSEI दोनों पर शुरू होगी. मार्केट इस साल की अब तक की सबसे बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग में से एक के लिए ग्रे मार्केट के रुझानों पर कड़ी नजर रखे हुए है.
NSE IPO का GMP
लिस्टिंग से पहले, NSE के अनलिस्टेड शेयर IPO प्राइस से सिर्फ 2% ज्यादा प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे, जो कल एक सुस्त लिस्टिंग का संकेत है. कल NSE की तय मार्केट शुरुआत के साथ ही BSE के बाद भारत के दूसरे लिस्टेड स्टॉक एक्सचेंज के तौर पर लिस्ट होने की इसकी लंबी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. कंपनी का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग इस महीने की शुरुआत में लॉन्च किया गया था, जिसका मकसद मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 12.64 करोड़ शेयरों की ‘ऑफर फॉर सेल’ के जरिए 22,562 करोड़ रुपए जुटाना था. इसका मतलब है कि IPO से मिलने वाली रकम NSE को नहीं मिलेगी, क्योंकि यह रकम शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी.
150 से ज्यादा एंकर इन्वेस्टर्स से 6,746 करोड़ जुटाए
NSE के शेयर 1,700 रुपए से 1,785 रुपए प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर ऑफर किए गए थे. 8 शेयरों के लॉट साइज के साथ, कम से कम रिटेल एप्लीकेशन की रकम 14,280 रुपए बनती है. IPO के पब्लिक बिडिंग के लिए खुलने से एक दिन पहले, स्टॉक एक्सचेंज ने 150 से ज्यादा एंकर इन्वेस्टर्स से 6,746 करोड़ रुपए जुटाए थे. एंकर बुक में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का हिस्सा 2,883 करोड़ रुपए या 43% था. इसमें 20 से ज्यादा विदेशी लॉन्गओनली फंड्स ने हिस्सा लिया, जिनमें सिंगापुर का सॉवरेन वेल्थ फंड GIC, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और नॉर्जेस बैंक शामिल थे.
घरेलू निवेशकों ने दिखाई जबरदस्त दिलचस्पी
घरेलू संस्थागत निवेशकों की मांग भी काफी व्यापक थी. 25 से ज़्यादा म्यूचुअल फंड और 11 बीमा व पेंशन कंपनियों ने एंकर बुक का लगभग 53 फीसदी यानी 3,588 करोड़ रुपए निवेश किया. NSE में 10.72 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़े शेयरधारक LIC ने एंकर राउंड के दौरान LIC, LIC म्यूचुअल फंड और LIC पेंशन फंड के ज़रिए 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया. यह निवेश तब हुआ है जब IPO में पेश की जा रही हिस्सेदारी की तुलना में LIC की मौजूदा होल्डिंग पहले से ही ज्यादा है. SBI ग्रुप, जो स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और SBI कैपिटल मार्केट्स के ज़रिए NSE में 1 फीसदी हिस्सेदारी बेच रहा है, उसने भी SBI म्यूचुअल फंड, SBI जनरल, SBI लाइफ और SBI पेंशन फंड के जरिए एक्सचेंज में निवेश किया. उसका कुल निवेश 400 करोड़ रुपए से ज्यादा है.
कितना हुआ सब्सक्राइब
NSE के पहले पब्लिक इश्यू में तीन दिनों की पब्लिक बिडिंग के दौरान निवेशकों ने जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई. 17 सितंबर से 21 सितंबर के बीच इसे ऑफर साइज से लगभग 6 गुना ज्यादा सब्सक्राइब किया गया. क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने मांग में सबसे आगे रहते हुए अपने लिए आरक्षित हिस्से को लगभग 13 गुना बुक किया, जबकि रिटेल निवेशकों और नॉनइंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए रखे गए हिस्सों को क्रमशः 1.4 गुना और 6.6 गुना बुक किया गया.



