
किसी ने शायद ही सोचा होगा कि कुत्तों को घुमाने का काम किसी के लिए इतनी बड़ी कमाई का जरिया बन सकता है। ब्रिटेन की 30 वर्षीय लिज ईस्ट ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। कभी क्रिमिनल डिफेंस से जुड़े मामलों में पैरालीगल के तौर पर काम करने वाली लिज ने अपनी नौकरी छोड़कर डॉग-वॉकिंग का बिजनेस शुरू किया।
शुरुआत में लोगों ने उनके फैसले का मजाक भी उड़ाया। कुछ लोगों का कहना था कि इतनी पढ़ाई-लिखाई करने के बाद आखिर वह कुत्ते घुमाने का काम क्यों कर रही हैं। लेकिन लिज के मुताबिक, इस फैसले ने उनकी जिंदगी ही बदल दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अब डॉग-वॉकिंग के जरिए एक दिन में करीब 400 से 530 डॉलर तक कमा लेती हैं, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 38 हजार से 50 हजार रुपये के आसपास बैठता है।
12 से 14 घंटे की नौकरी ने कर दिया था परेशान
लिज ने करीब चार साल तक क्रिमिनल केसों से जुड़े मामलों में पैरालीगल के रूप में काम किया। उनकी नौकरी में लंबे समय तक काम करना और लगातार व्यस्त रहना शामिल था।
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें रोजाना ऑफिस आने-जाने में करीब दो घंटे लग जाते थे और कई बार 12 से 14 घंटे तक काम करना पड़ता था। देर रात तक ऑफिस के काम और सामाजिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण उन्हें महसूस होने लगा था कि उनकी निजी जिंदगी लगभग खत्म हो रही है।
लिज के मुताबिक, वह खुद को अपनी उम्र से कहीं ज्यादा थका हुआ महसूस करने लगी थीं। लगातार काम के दबाव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वह इसी तरह की जिंदगी आगे भी जीना चाहती हैं।
पति को कुत्तों के साथ देखकर आया आइडिया
लिज के पति पहले से ही कुत्तों को घुमाने और उनकी देखभाल से जुड़े काम करते थे। लिज ने देखा कि उनका पति इस काम को करते हुए खुश रहता है और उसे अपने काम में संतुष्टि मिलती है।
यहीं से लिज को अपने करियर को लेकर एक नया विचार आया। उन्होंने महसूस किया कि काम ऐसा भी हो सकता है जिसमें कम तनाव हो और साथ ही उससे अच्छी कमाई भी की जा सके।
इसके बाद उन्होंने अपनी पैरालीगल की नौकरी छोड़ दी और डॉग-वॉकिंग बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।
लोगों ने उड़ाया मजाक, लेकिन लिज ने नहीं मानी हार
नौकरी छोड़ने के बाद जब लिज ने डॉग-वॉकिंग को अपना करियर बनाया तो कई लोगों ने सवाल उठाए। उन्हें यह तक सुनना पड़ा कि इतनी पढ़ाई करने के बाद क्या सिर्फ कुत्ते घुमाने के लिए नौकरी छोड़ी है?
लेकिन लिज ने लोगों की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने काम पर फोकस किया। धीरे-धीरे उनका बिजनेस बढ़ने लगा और कुत्तों की देखभाल तथा उन्हें घुमाने के लिए लोगों से उन्हें लगातार काम मिलने लगा।
एक दिन में 400 से 530 डॉलर तक कमाई का दावा
लिज की कहानी का सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाला हिस्सा उनकी कमाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह डॉग-वॉकिंग के जरिए रोजाना करीब 400 से 530 डॉलर तक कमा रही हैं।
भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 38 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिदिन के बराबर होती है। हालांकि, यह कमाई काम की मात्रा, ग्राहकों की संख्या और बिजनेस के खर्चों के आधार पर बदल सकती है।
लिज का कहना है कि अब वह पहले की तुलना में कम समय और कम मानसिक दबाव में काम कर रही हैं, जबकि उनकी कमाई भी अच्छी हो गई है।
सिर्फ कुत्ते घुमाना नहीं, पूरा बिजनेस मॉडल
लिज की कहानी यह भी दिखाती है कि डॉग-वॉकिंग को केवल पार्ट-टाइम काम समझना जरूरी नहीं है। सही ग्राहक आधार और व्यवस्थित तरीके से इसे एक बिजनेस के तौर पर चलाया जा सकता है।
कुत्तों के मालिक अक्सर ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं जो उनके पालतू जानवरों को समय पर घुमाएं, उनकी देखभाल करें और उनके साथ कुछ समय बिताएं। खासकर व्यस्त पेशेवरों के लिए ऐसी सेवाओं की मांग हो सकती है।
लिज ने इसी जरूरत को अपने काम का आधार बनाया।
लिज की कहानी से क्या सीख मिलती है?
लिज की कहानी का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने पारंपरिक करियर छोड़कर अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से नया रास्ता चुना। उनके लिए सफलता का मतलब सिर्फ बड़ी नौकरी या ज्यादा सैलरी नहीं था, बल्कि ऐसी जिंदगी पाना भी था जिसमें उन्हें अपने समय और काम पर ज्यादा नियंत्रण मिले।
उनकी कहानी उन लोगों के लिए भी एक उदाहरण बन गई है जो करियर बदलने के बारे में सोचते हैं, लेकिन समाज की प्रतिक्रिया के डर से कदम नहीं उठा पाते।
हालांकि, हर व्यक्ति के लिए ऐसा बिजनेस समान कमाई की गारंटी नहीं देता। इसमें ग्राहक जुटाना, जानवरों की सुरक्षा, जिम्मेदारी, यात्रा और बिजनेस से जुड़े दूसरे खर्च भी शामिल होते हैं।
नौकरी छोड़कर बनाया अपना रास्ता
लिज ईस्ट की कहानी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने एक पूरी तरह अलग क्षेत्र में जाने का फैसला किया। जिस काम को कुछ लोगों ने शुरुआत में छोटा समझकर उनका मजाक उड़ाया, उसी को उन्होंने अपने लिए कमाई और बेहतर जीवनशैली का जरिया बना लिया।
उनकी कहानी यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि क्या सफलता का मतलब हमेशा पारंपरिक नौकरी और बड़ा पद ही होता है? शायद कई बार अपने समय, पसंद और मानसिक संतुष्टि के हिसाब से काम चुनना भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होता।



