उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम से जुड़े मामले को लेकर विवाद बना हुआ है. एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने छात्रा की हिरासत से जुड़े मामले में जिलाधिकारी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. लेकिन अब लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन की ओर से सुनवाई के दौरान वर्चुअल हियरिंग की आवाज बंद किए जाने पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट को खुला पत्र लिखा गया है. साथ ही स्पेशल लिस्टिंग को लेकर भी चिंता जताई.

देश की सबसे बड़ी अदालत को लिखे पत्र में एसोसिएशन ने कहा, “लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ देशभर के वकीलों का एक संगठन है. हमारे संगठन का मकसद और आदर्श वाक्य संविधान और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना है.”
‘केस की लिस्टिंग को लेकर कानूनी हलकों में चिंता’
“हालांकि पिछले दिनों नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत एक छात्रा की हिरासत से जुड़े मामले में नोएडा की जिलाधिकारी के खिलाफ की गई सख्त टिप्पणियों के मामले को जिस तरह से लिस्ट किया गया, उसने कानूनी हलकों में चिंता पैदा कर दी है. यह मामला नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत से जुड़ा था और सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा जजों के रोस्टर के हिसाब से, यह केस उस कोर्ट के सामने नहीं आना चाहिए था जहां इसे लिस्ट किया गया था.”
एसोसिएशन ने आगे कहा, “ऐसा लगता है कि यह मामला खास तौर पर एक बेंच को सौंपा गया था. यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि याचिकाकर्ता, जो एक सरकारी कर्मचारी हैं, और भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी भी हैं. मामले को सामान्य क्रम से हटाकर लिस्ट करने से इसे खास तवज्जो मिली है और इससे एक गलत मिसाल कायम होने की संभावना है.”
‘खास प्राथमिकता और विशेष व्यवहार को लेकर चिंता’
पत्र में आगे लिखा गया, “कोर्ट में सुनवाई सार्वजनिक होती है. वकीलों, पत्रकारों और आम लोगों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा होने से ये चीजें और आसान हो गई हैं. लेकिन एक ऐसे मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा को म्यूट कर दिया गया जो मीडिया और जनता दोनों के लिए बेहद अहम है. यह मामला मजदूरों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करने पर NSA के तहत छात्रों की हिरासत से जुड़ा है.”
“हम इस मामले में दी गई खास प्राथमिकता और विशेष व्यवहार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं. साथ ही इस मामले से निपटने के तरीके और इसकी लिस्टिंग को लेकर जनता में गहरी चिंता है. किसी खास बेंच के सामने मामले की विशेष लिस्टिंग से न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा भी नहीं बढ़ा.
हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में लगाई रोक
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कल बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा को अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोधप्रदर्शन के सिलसिले में एक छात्रा को एनएसए के तहत हिरासत में रखने के लिए अपने वेतन से 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था.
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने मेघा रूपम की याचिका पर नोटिस जारी किया और आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द करने के हाई कोर्ट के निर्देश पर रोक भी लगा दी. शीर्ष अदालत ने DM मेधा और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल 2 अलगअलग याचिकाओं पर ये अंतरिम आदेश पारित किए.



