
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में प्रदेश की आधुनिक सिंचाई और जल प्रबंधन व्यवस्था की झलक देखने को मिलेगी। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक होने वाले ट्रेड शो में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से हॉल6 में पवेलियन लगाया जाएगा। यहां लाइव इंजीनियरिंग मॉडल के जरिए सिंचाई परियोजनाओं, बांधबैराजों, नहरों, बाढ़ नियंत्रण और स्मार्ट जल प्रबंधन में इस्तेमाल हो रही तकनीक प्रदर्शित की जाएगी। यूपीआईटीएस2026 में 25 से 29 सितंबर तक आयोजन की आधिकारिक पुष्टि आयोजकों ने की है।
प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग के अनुसार पवेलियन में बाणसागर नहर, पहाड़ी बांध, अर्जुन सहायक नहर और सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना समेत प्रमुख परियोजनाओं के मॉडल प्रदर्शित होंगे। विभाग के अनुसार पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचाई क्षेत्र विकसित और 2.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पुनर्स्थापित किया गया। इस तरह 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार या पुनर्स्थापन हुआ, जिससे 44.81 लाख किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं।
स्काडा से रियल टाइम निगरानी
पवेलियन में स्मार्ट सिंचाई प्रणाली प्रमुख आकर्षण होगी। विभाग के अनुसार नहर संचालन, सिंचाई जल वितरण और सरकारी नलकूपों की निगरानी में स्काडा, एआई और आईओटी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। 15 प्रमुख बांधों और बैराजों पर स्काडा सिस्टम लगाए गए हैं, जिनसे कंट्रोल रूम से गेटों का इलेक्ट्रॉनिक संचालन और रियल टाइम डेटा प्राप्त किया जा सकता है। बाढ़ नियंत्रण में तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के साथ कंक्रीट मैट्रेस, सिल्ट वेन, शीट पाइल, परमेबल स्ट्रक्चर और टेट्रापॉड जैसी तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी। विभाग के अनुसार 58 स्थानों पर ड्रेजिंग कर नदी प्रवाह को व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए हैं।
कम पानी में ज्यादा सिंचाई पर जोर
पवेलियन में ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ की अवधारणा के तहत स्प्रिंकलर और प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। हमीरपुर, महोबा और ललितपुर की परियोजनाओं के साथ सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में विकसित सात प्रेशर सिंचाई प्रणालियों की जानकारी दी जाएगी। सौर ऊर्जा नीति के तहत नलकूपों, लिफ्ट नहरों और सिंचाई परियोजनाओं में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल तथा नहरों के वाटरवेज पर सोलर प्लांट की संभावनाएं भी प्रदर्शित होंगी। विभाग के अनुसार नहरों की सिल्ट सफाई 27,551 किलोमीटर से बढ़कर 55,320 किलोमीटर हुई है, जबकि कुल सिंचित क्षेत्र 82.54 लाख से बढ़कर 106.82 लाख हेक्टेयर हुआ है।



