नई दिल्ली। बीमा पॉलिसी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने बीमा वितरण व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसमें बीमा एजेंटों और अन्य वितरकों को मिलने वाले कमीशन पर उत्पाद और वितरण माध्यम के हिसाब से नई सीमाएं तय करने की बात कही गई है।

कमीशन की व्यवस्था में होगा बदलाव
IRDAI के प्रस्ताव के मुताबिक अब सभी बीमा उत्पादों के लिए एक जैसी कमीशन सीमा नहीं होगी। कमीशन की सीमा बीमा के प्रकार, वितरण चैनल, पॉलिसी की अवधि, उत्पाद की जटिलता और उसे बेचने एवं सेवा देने में लगने वाली मेहनत जैसे आधारों पर तय की जाएगी।
मसलन, व्यक्तिगत शुद्ध टर्म इंश्योरेंस में पहले साल के लिए एजेंट का प्रस्तावित कमीशन 30 प्रतिशत और अन्य वितरण संस्थाओं के लिए 25 प्रतिशत रखा गया है। वहीं व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा में पहली बिक्री पर वितरण संस्थाओं के लिए करीब 15 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 20 प्रतिशत की सीमा प्रस्तावित है।
पॉलिसी सस्ती होने की उम्मीद क्यों?
IRDAI का कहना है कि बीमा कंपनियों के वितरण और संचालन से जुड़े खर्च कम होने पर बीमा की कुल लागत घट सकती है। नियामक ने प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य ग्राहकों के लिए बीमा का मूल्य बेहतर करना और सामान्य बीमा में जोखिम कवर का दायरा बढ़ाना बताया है।
हालांकि, इसका यह मतलब अभी नहीं है कि हर बीमा पॉलिसी तुरंत सस्ती हो जाएगी। खर्च कम होने से ग्राहकों को कितना लाभ मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बीमा कंपनियां उस बचत को प्रीमियम, रिटर्न या अन्य ग्राहक लाभों में किस तरह पहुंचाती हैं।
कमीशन के साथ खर्च पर भी लगाम
IRDAI ने बीमा कंपनियों के Expenses of Management को भी चरणबद्ध तरीके से कम करने का प्रस्ताव दिया है। जीवन बीमा कंपनियों के लिए इसे दो साल में 15 प्रतिशत और पांच साल में 12.5 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव है। सामान्य बीमा कंपनियों के लिए पांच साल में इसे 20 प्रतिशत तक लाने की योजना प्रस्तावित है।
मिससेलिंग पर भी सख्ती
प्रस्ताव में गलत तरीके से पॉलिसी बेचने यानी मिससेलिंग पर भी सख्ती की बात है। ऐसे मामलों में कमीशन वापस लेने की व्यवस्था यानी क्लॉबैक का प्रस्ताव है। साथ ही ग्राहकों को बीमा बेचने वाले व्यक्ति की पहचान और बिक्री से जुड़ी जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने की योजना भी रखी गई है।
अभी प्रस्ताव है, अंतिम फैसला नहीं
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये बदलाव अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं। IRDAI ने इस संबंध में सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं और प्रतिक्रिया देने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर 2026 बताई गई है। इसके बाद प्रक्रिया के आधार पर अंतिम नियमों में बदलाव हो सकता है।
यानी बीमा ग्राहकों के लिए संभावित राहत की दिशा में बड़ा कदम जरूर है, लेकिन पॉलिसी प्रीमियम वास्तव में कितना घटेगा, यह अंतिम नियम लागू होने और बीमा कंपनियों की कीमत तय करने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा



