
वाशिंगटन। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ाया है। अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए भारतीय और भारतीय मूल के कई वैज्ञानिकों का चयन किया है। इनमें जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल, आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर नीलिमा सत्यम, भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक अब्दुल कादिर और फैसल हुसैन शामिल हैं।
खास बात यह है कि इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश का भी खास कनेक्शन जुड़ा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र फैसल हुसैन को AGU के ‘एंबेसडर अवार्ड’ के लिए चुना गया है। वर्तमान में वह अमेरिका के सिएटल स्थित वाशिंगटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उनकी उपलब्धि से वाराणसी स्थित BHU से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ा है। यूपी की धरती से निकलकर विदेश में अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाली शख्सियतों की सूची में एक और नाम जुड़ गया है।
BHU से अमेरिका तक फैसल हुसैन का सफर
फैसल हुसैन ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल की है। BHU से निकलने के बाद उन्होंने अकादमिक और शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। वर्तमान में वह वाशिंगटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
अमेरिकी जियोफिजिकल यूनियन की ओर से उन्हें ‘एंबेसडर अवार्ड’ के लिए चुना जाना BHU के वैश्विक अकादमिक प्रभाव और यूपी से निकली प्रतिभा की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। फैसल हुसैन की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि BHU लंबे समय से देशविदेश में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं का केंद्र रहा है।
यूपी के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
उत्तर प्रदेश के किसी शिक्षण संस्थान से पढ़ाई कर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाली ऐसी उपलब्धियां प्रदेश की शैक्षणिक विरासत को भी रेखांकित करती हैं। प्रोफेसर हुसैन का सफर उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है, जो यूपी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और अकादमिक क्षेत्र में अपना मुकाम बनाना चाहते हैं। BHU से अमेरिका तक का यह सफर यूपी की प्रतिभा, शिक्षा और वैश्विक पहचान की कहानी को एक नई मजबूती देता है।
जलवायु विज्ञान में रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल का योगदान
पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान में कार्यरत जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल को ‘पावेल एस. मोलचानोव क्लाइमेट कम्युनिकेशंस प्राइज’ के लिए चुना गया है। कोल्ल ने हिंद महासागर के बढ़ते तापमान, मानसून में बदलाव, समुद्र की गर्म होती सतह, चक्रवात और अत्यधिक बारिश जैसे विषयों पर शोध और वैज्ञानिक संचार किया है। उनके काम में इन जलवायु बदलावों का दक्षिण एशिया के लोगों और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों का भी अध्ययन शामिल है। इस पुरस्कार के तहत विजेता को 25,000 अमेरिकी डॉलर, नाम अंकित पुरस्कार और सम्मान प्रदान किया जाता है।
नीलिमा सत्यम को मिलेगा देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल
आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर नीलिमा सत्यम को ‘देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल’ के लिए चुना गया है। यह सम्मान पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध करने वाले शुरुआती या मध्य स्तर के करियर वाले वैज्ञानिक को दिया जाता है। भूतकनीकी इंजीनियरिंग, भूकंपीय जोखिम, आपदारोधी बुनियादी ढांचे और भूजोखिम कम करने के क्षेत्र में शोध करने वाली सत्यम को नाम अंकित पदक के साथ AGU की आजीवन सदस्यता भी प्रदान की जाएगी।
भारतीय मूल के अब्दुल कादिर भी सम्मान सूची में
भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक अब्दुल कादिर को ‘साइंस फॉर सॉल्यूशंस अवार्ड’ के लिए चुना गया है। वह मैरीलैंड विश्वविद्यालय में सहायक शोध प्रोफेसर हैं। उन्होंने शिलांग स्थित नॉर्थ ईस्ट स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के साथ भी काम किया है।
दिसंबर में सैन फ्रांसिस्को में होगा सम्मान
AGU ने वर्ष 2026 के लिए कुल 43 पुरस्कारों की घोषणा की है। सभी चयनित वैज्ञानिकों को दिसंबर में सैन फ्रांसिस्को में आयोजित होने वाली AGU की वार्षिक बैठक के दौरान सम्मानित किया जाएगा। भारतीय वैज्ञानिकों की इस सूची में BHU के पूर्व छात्र फैसल हुसैन का शामिल होना यूपी के लिए खास उपलब्धि है। वाराणसी से शुरू हुआ उनका शैक्षणिक सफर अमेरिका तक पहुंचा और अब अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के प्रतिष्ठित सम्मान से जुड़ गया है।



