
थायराइड के मरीजों में अक्सर यह भ्रम रहता है कि उनके लिए कौन सा नमक सही है। क्या आयोडीन युक्त नमक लेना चाहिए या फिर सेंधा नमक (Rock Salt)? खासकर हाइपोथायरायडिज्म में वजन बढ़ने और हाइपरथायराइडिज्म में वजन घटने जैसी समस्याओं के कारण लोग नमक को लेकर कई तरह की धारणाएं बना लेते हैं। हालांकि, शरीर में आयोडीन की कमी या जरूरत से ज्यादा आयोडीन, दोनों ही कुछ परिस्थितियों में थायराइड के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।
मुंबई की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (हार्मोन विशेषज्ञ) डॉ. तनवी मयूर पटेल के अनुसार, थायराइड के मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि उन्हें आयोडाइज्ड नमक खाना चाहिए या नॉन-आयोडाइज्ड नमक। थायराइड ग्रंथि T3 और T4 हार्मोन बनाती है और इनके निर्माण के लिए आयोडीन जरूरी होता है। हमारा शरीर खुद आयोडीन नहीं बनाता, इसलिए इसकी पूर्ति भोजन के जरिए करनी पड़ती है। अब सवाल उठता है कि शरीर में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए कौन सा नमक लेना चाहिए? क्या थायराइड के मरीजों को आयोडाइज्ड नमक छोड़कर सेंधा नमक लेना चाहिए? आइए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. तनवी मयूर पटेल से जानते हैं।
बॉडी में आयोडीन की कमी होने पर कैसा होता है असर
थायराइड की बीमारी कम या ज्यादा नमक खाने से सीधे नहीं होती, लेकिन शरीर में आयोडीन की कमी या जरूरत से ज्यादा आयोडीन थायराइड के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। शरीर में आयोडीन की कमी होने पर थायराइड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक गंभीर आयोडीन की कमी रहने पर गॉइटर और हाइपोथायराइडिज्म जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, जरूरत से ज्यादा आयोडीन का सेवन भी कुछ लोगों में थायराइड के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पर्याप्त आयोडीन खासतौर पर जरूरी है, क्योंकि थायराइड हार्मोन शरीर के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
शरीर के लिए कितनी मात्रा में आयोडीन जरूरी है?
आयोडीन की दैनिक जरूरत उम्र और स्थिति के अनुसार अलग अलग होती है। बच्चों में इसकी जरूरत कम होती है, जबकि 12 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए करीब 150 माइक्रोग्राम प्रतिदिन की जरूरत होती है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान आयोडीन की जरूरत बढ़ जाती है और यह करीब 250 माइक्रोग्राम प्रति दिन तक हो सकती है।
आयोडीन के दूसरे स्रोत कौन से हैं?
आयोडीन सिर्फ नमक से ही नहीं मिलता। समुद्री खाद्य पदार्थ, मछली, झींगा और कुछ समुद्री शैवाल इसके स्रोत हो सकते हैं। इसके अलावा दूध और कुछ डेयरी प्रोडक्ट से भी आयोडीन मिल सकता है। हालांकि, भोजन से मिलने वाली आयोडीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है।
क्या ज्यादा आयोडीन भी थायराइड के लिए नुकसानदायक है?
आयोडीन की कमी की तरह इसकी अत्यधिक मात्रा भी कुछ लोगों में थायराइड को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के आयोडीन सप्लीमेंट लेना सही नहीं माना जाता। कुछ दवाओं और मेडिकल प्रक्रियाओं में भी आयोडीन की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए थायराइड के मरीजों को अपने डॉक्टर को ऐसी दवाओं या जांच के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
क्या थायराइड के मरीज आयोडाइज्ड नमक खा सकते हैं?
डॉक्टर ने बताया थायराइड के मरीज आयोडाइज्ड नमक खा सकते हैं या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि थायराइड की समस्या किस वजह से है और व्यक्ति को भोजन से कितना आयोडीन मिल रहा है। अगर आयोडीन की कमी है, तो आयोडाइज्ड नमक उपयोगी हो सकता है। वहीं, जिन लोगों को भोजन या अन्य स्रोतों से पर्याप्त आयोडीन मिल रहा है, उनको अतिरिक्त आयोडीन की जरूरत नहीं होती। इसलिए थायराइड की बीमारी होने पर नमक को पूरी तरह बदलने या आयोडीन सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
हिमालयन पिंक सॉल्ट या सेंधा नमक कितना सही है?
हिमालयन पिंक सॉल्ट, रॉक सॉल्ट या सेंधा नमक को लोग अक्सर सामान्य नमक से ज्यादा हेल्दी मानते हैं। लेकिन इनमें आयोडीन की मात्रा आयोडाइज्ड नमक की तरह सुनिश्चित नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ नॉन-आयोडाइज्ड नमक इस्तेमाल करता है और भोजन से भी पर्याप्त आयोडीन नहीं मिल रहा है, तो आयोडीन की कमी हो सकती है। थायराइड के साथ-साथ नमक की कुल मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है। ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और पानी रुकने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि नमक आयोडाइज्ड है या नहीं, बल्कि रोजाना कुल कितना नमक लिया जा रहा है यह भी जरूरी है।
पैकेट और प्रोसेस्ड फूड से भी बढ़ सकता है नमक का सेवन
नमक का सेवन आप सिर्फ खाने में ही नहीं करते बल्कि आप इसे चिप्स, पापड़, अचार, इंस्टेंट और अन्य पैकेज्ड या प्रोसेस्ड फूड में भी काफी मात्रा में कंज्यूम करते हैं। इन फूड्स के जरिए व्यक्ति जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन कर सकता है।
थायराइड मरीज नमक को लेकर क्या सावधानी रखें?
थायराइड होने के बाद हर व्यक्ति को नॉन-आयोडाइज्ड नमक पर स्विच करने की जरूरत नहीं होती। आयोडाइज्ड नमक को पूरी तरह छोड़ने से पहले यह देखना जरूरी है कि शरीर को आयोडीन की पर्याप्त मात्रा दूसरे खाद्य स्रोतों से मिल रही है या नहीं। साथ ही, नमक की कुल मात्रा सीमित रखना भी जरूरी है। कौन सा नमक लेना है और आयोडीन की अतिरिक्त जरूरत है या नहीं, यह व्यक्ति की बीमारी, खान-पान और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। थायराइड मरीज नमक या आयोडीन की मात्रा में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।



