
कभी-कभी इंसान ऐसे अनुभवों से गुजरता है, जिन्हें समझाना आसान नहीं होता। अमेरिका की रहने वाली वानिया वाल्ट्रियानी का दावा भी कुछ ऐसा ही है। ब्रेन ब्लीड के बाद वह करीब तीन दिनों तक कोमा में रहीं। होश में आने के बाद उन्होंने अपने अनुभव के बारे में जो बताया, उसने लोगों के बीच नियर डेथ एक्सपीरियंस यानी मृत्यु के करीब पहुंचने के अनुभव को लेकर चर्चा छेड़ दी।
वानिया के मुताबिक, कोमा के दौरान उन्हें लगा कि वह अपने शरीर से अलग हो चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने एक बेहद शांत और खूबसूरत जगह देखने का दावा किया, जहां उनकी मुलाकात अपने दिवंगत पिता से हुई। हालांकि, उनके अनुभवों को विज्ञान की ओर से किसी परलोक के प्रमाण के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
पार्टी में डांस करते समय अचानक बिगड़ी तबीयत
बताया जाता है कि साल 2014 में 45 वर्षीय वानिया एक पार्टी में डांस कर रही थीं। इसी दौरान अचानक उनके सिर में तेज दर्द हुआ। दर्द इतना ज्यादा था कि उन्हें लगा जैसे सिर पर जोरदार चोट लगी हो।
बाद में डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि उनके दिमाग की एक नस फट गई थी। उनकी हालत बेहद गंभीर थी और डॉक्टरों ने परिवार को उनकी स्थिति को लेकर चिंता जताई। इसके बाद वानिया करीब तीन दिनों तक गहरे कोमा में रहीं।
कोमा के दौरान खुद को शरीर से बाहर देखने का दावा
वानिया का कहना है कि जब अस्पताल में डॉक्टर उनकी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे, उस दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह अपने शरीर से बाहर निकल चुकी हैं।
उनके मुताबिक, उन्होंने खुद को अस्पताल के बेड पर लेटे हुए देखा। इसके बाद उन्हें एक ऐसी जगह महसूस हुई, जहां उन्हें न दर्द था और न ही डर। उन्होंने उस अनुभव को बेहद शांत और खूबसूरत बताया।
यही वह दौरान था, जब वानिया ने अपने दिवंगत पिता को देखने का दावा किया।
16 साल पहले मर चुके पिता से मिलने का दावा
वानिया के मुताबिक, उनके पिता की मौत करीब 16 साल पहले हो चुकी थी। लेकिन कथित नियर डेथ एक्सपीरियंस के दौरान उन्हें अपने पिता दिखाई दिए।
उनका दावा है कि पिता उस अवस्था में बूढ़े नहीं बल्कि काफी जवान नजर आ रहे थे। उन्होंने अपने पिता को एक चमकती हुई रोशनी से घिरा हुआ भी महसूस किया।
वानिया के अनुसार, उनके पिता ने उन्हें गले लगाया और उन्हें यह एहसास कराया कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है और सब ठीक हो जाएगा।
‘मौत अंत नहीं है’ का संदेश मिलने का दावा
वानिया ने बताया कि इस अनुभव के दौरान उन्हें ऐसा संदेश महसूस हुआ कि मौत जीवन की कहानी का अंत नहीं है। उन्होंने कथित तौर पर महसूस किया कि जिस दुनिया में वह पहुंची थीं, वहां उन्हें कोई डर या तकलीफ नहीं थी।
उनका कहना है कि वह उस अवस्था से वापस नहीं लौटना चाहती थीं। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें अपने शरीर में वापस जाने का एहसास हुआ और फिर उन्होंने दर्द के साथ होश में आना शुरू किया।
होश में आने के बाद भाषा को लेकर भी किया दावा
करीब तीन दिन बाद जब वानिया को होश आया, तो उन्होंने अपने अनुभव के बारे में बताया। उनके दावे का एक और हिस्सा लोगों के लिए हैरान करने वाला था।
वानिया के मुताबिक, होश में आने के बाद उन्हें अपनी मातृभाषा पुर्तगाली याद नहीं रही और उस समय वह केवल अंग्रेजी बोल पा रही थीं। इस बदलाव ने उनके अनुभव को और भी चर्चा में ला दिया।
क्या होता है नियर डेथ एक्सपीरियंस?
नियर डेथ एक्सपीरियंस यानी NDE उन असामान्य अनुभवों को कहा जाता है, जिनकी रिपोर्ट कुछ लोग गंभीर बीमारी, चोट या ऐसी स्थिति के दौरान करते हैं जहां वे मृत्यु के बेहद करीब होते हैं। कुछ लोग रोशनी देखने, शरीर से अलग महसूस करने, किसी परिचित व्यक्ति से मिलने या बेहद शांति महसूस करने जैसी बातें बताते हैं।
हालांकि, ऐसे अनुभवों की वैज्ञानिक व्याख्या को लेकर अभी भी शोध जारी है। इन्हें सीधे तौर पर मृत्यु के बाद जीवन या किसी दूसरे लोक के अस्तित्व का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाता।
वानिया वाल्ट्रियानी की कहानी भी उनके व्यक्तिगत अनुभव और दावे के रूप में सामने आती है। उनके अनुभव ने जरूर यह सवाल खड़ा किया है कि गंभीर अवस्था में मानव मस्तिष्क किस तरह के अनुभव पैदा कर सकता है और उन अनुभवों को इंसान किस तरह महसूस करता है।



