IndiaTrendingUncategorized

IIT ने 22 कंपनियों के खिलाफ लिया सख्त फैसला, दो साल तक कैंपस प्लेसमेंट में नहीं मिलेगा सहयोग

IIT ने 22 कंपनियों के खिलाफ लिया सख्त फैसला, दो साल तक कैंपस प्लेसमेंट में नहीं मिलेगा सहयोग

देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) ने छात्रों के जॉब ऑफर को लेकर कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ऑल IIT प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) ने उन 22 कंपनियों के खिलाफ अगले दो कैंपस प्लेसमेंट सीजन तक ‘नॉन-कोऑपरेशन’ का फैसला किया है, जिन्होंने छात्रों को नौकरी का ऑफर देने के बाद उसे पूरा नहीं किया।

जानकारी के मुताबिक, इन कंपनियों ने देश के सभी 23 IITs के 150 से अधिक छात्रों को नौकरी के ऑफर दिए थे, लेकिन बाद में छात्रों की जॉइनिंग या नियुक्ति को लेकर अपने वादे से पीछे हट गईं। इससे प्रभावित छात्रों के करियर पर सीधा असर पड़ा।

दो साल तक भर्ती प्रक्रिया में नहीं मिलेगा सहयोग

AIPC की बैठक में तय किया गया कि इन 22 कंपनियों को अगले दो प्लेसमेंट सीजन के दौरान IITs की ओर से भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह का सहयोग नहीं दिया जाएगा। हालांकि, IIT ने इसे आधिकारिक तौर पर ‘ब्लैकलिस्टिंग’ नहीं कहा है। इसके लिए ‘नॉन-कोऑपरेशन’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

AIPC के समन्वयक और IIT गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन जोस के मुताबिक, सभी संबंधित कंपनियों को 30 सितंबर तक ईमेल के जरिए इस फैसले की आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। यह असहयोग दो साल तक प्रभावी रहेगा।

बताया गया है कि कंपनियों को प्रभावित छात्रों की नियुक्ति पूरी करने के लिए 15 सितंबर तक का समय दिया गया था। लेकिन तय समयसीमा तक इन कंपनियों की ओर से छात्रों को जॉइनिंग नहीं दी गई।

Oracle समेत 22 कंपनियां फैसले के दायरे में

कैंपस से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस सूची में प्रमुख टेक कंपनी Oracle भी शामिल है। आरोप है कि Oracle की ओर से अलग-अलग IITs में दिए गए करीब 40 जॉब ऑफर्स पूरे नहीं किए गए।

हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के मामलों में ऑफर, जॉइनिंग और नियुक्ति से जुड़ी परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। IITs का मौजूदा फैसला मुख्य रूप से उन छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्हें ऑफर मिलने के बाद नौकरी नहीं मिल सकी।

प्रभावित छात्रों के लिए IITs ने शुरू की नई पहल

जॉब ऑफर पूरा नहीं होने के बाद छात्रों को अकेला न छोड़ते हुए सभी 23 IITs के प्लेसमेंट सेल अब मिलकर काम कर रहे हैं। प्रभावित छात्रों के सीवी उन दूसरी कंपनियों तक पहुंचाए जा रहे हैं, जो कैंपस प्लेसमेंट में पहले से भर्ती कर रही हैं।

इस क्रॉस-रेफरल व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित छात्रों को दोबारा नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके अलावा कई छात्र ऑफ-कैंपस प्लेसमेंट और व्यक्तिगत स्तर पर भी नई नौकरियों की तलाश कर रहे हैं।

छात्रों के हित में लिया गया फैसला

IITs के इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के दौरान दिए गए जॉब ऑफर को लेकर गंभीर रहें। किसी छात्र को नौकरी का ऑफर मिलने के बाद कंपनी के पीछे हटने से उसकी आगे की नौकरी की योजना और करियर पर असर पड़ सकता है।

ऐसे में 22 कंपनियों के खिलाफ दो प्लेसमेंट सीजन तक सहयोग रोकने का फैसला कैंपस रिक्रूटमेंट प्रक्रिया में कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर IITs के सख्त रुख को दिखाता है। वहीं, प्रभावित छात्रों के लिए दूसरे भर्ती अवसर तलाशने की कोशिश भी जारी है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply