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​SUV के बीच फिर क्यों बढ़ रही छोटी कारों की डिमांड? जानें क्यों बदल रहा है सेडान का दौर

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग ऐसी कार चाहते हैं, जो चलाने में आसान हो, आरामदायक हो और जेब पर भी ज्यादा भारी न पड़े. यही वजह है कि कारों को लेकर लोगों की पसंद भी धीरेधीरे बदल रही है. एसयूवी का क्रेज तो पहले से ही देखने को मिल रहा है, लेकिन अब कई लोग सेडान की जगह पुरानी हैचबैक या छोटी कार खरीदने को तरजीह दे रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सेडान का दौर क्यों कमजोर पड़ रहा है और छोटी कारें दोबारा लोगों का ध्यान क्यों खींच रही हैं?

​SUV के बीच फिर क्यों बढ़ रही छोटी कारों की डिमांड? जानें क्यों बदल रहा है सेडान का दौर

बढ़ती कारों की कीमत भी बड़ी वजह

आज लगबग हर चीज महंगी हो रही है और कारों की कीमतें भी इससे अछूती नहीं हैं.ऐसे में बहुत से खरीदार ऐसी कार लेना चाहते हैं, जिसकी शुरुआती कीमत कम हो और जिसे लंबे समय तक चलाना भी जेब पर भारी न पड़े. छोटी इस मामले में ज्यादा प्रैक्टिकल विकल्प बन जाती हैं.

अगर कार का इस्तेमाल मुख्य रूप से ऑफिस आनेजाने, बाजार जाने या रोजमर्रा के छोटे सफर के लिए होना है, तो हर कोई बड़ी और महंगी कार पर ज्यादा पैसा खर्च करना जरूरी नहीं समझता. इसके अलावा बड़ी कारों का मेंटेनेंस और सर्विस खर्च भी कई मामलों में ज्यादा हो सकता है. यही वजह है कि बजट को ध्यान में रखने वाले खरीदार छोटी कारों की तरफ देख रहे हैं.

पेट्रोलडीजल का खर्च भी बढ़ा रहा चिंता

कार खरीदने के बाद सबसे बड़ा खर्च उसे चलाने का आता है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों को देखते हुए लोग अब माइलेज को भी काफी गंभीरता से लेते हैं. बड़ी और भारी कारों में आमतौर पर ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ सकती है, जबकि छोटी कारें रोजाना के सफर में कम खर्च वाला विकल्प साबित हो सकती हैं.

यही वजह है कि कई खरीदार कार खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत नहीं, बल्कि हर महीने होने वाले ईंधन खर्च का भी हिसाब लगाने लगे हैं. खासकर रोज लंबी दूरी तय करने वालों के लिए यह फर्क काफी मायने रखता है.

पार्किंग की टेंशन से भी छोटी कारों को फायदा

बड़े शहरों में की समस्या किसी से छिपी नहीं है. घर, ऑफिस, बाजार या मॉल के आसपास कई बार कार खड़ी करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती. ऐसे में छोटी कारों को पार्क करना अपेक्षाकृत आसान रहता है.

इसके अलावा संकरी गलियों और कम जगह वाली सड़कों पर भी छोटी कार को चलाना और मोड़ना आसान होता है. बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह छोटी सी बात रोजमर्रा की ड्राइविंग में काफी बड़ा फायदा बन सकती है.

भारी ट्रैफिक में छोटी कार ज्यादा आसान

शहरों में बढ़ता ट्रैफिक भी लोगों की कार पसंद को प्रभावित कर रहा है. पीक ऑवर में सड़कों पर लंबा जाम लगा हो तो बड़ी कार को संभालना कई बार मुश्किल हो जाता है. इसके मुकाबले छोटी कार कम जगह में आसानी से चल जाती है और तंग रास्तों या भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ड्राइविंग थोड़ी आसान महसूस हो सकती है.

हालांकि, सिर्फ इन वजहों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि सेडान का दौर पूरी तरह खत्म हो रहा है. कार बाजार में किसी भी सेगमेंट की मांग कई चीजों पर निर्भर करती है, जिसमें कीमत, फीचर्स, माइलेज, डिजाइन और ग्राहकों की जरूरत शामिल हैं. इसलिए सेडान की लोकप्रियता भले ही कुछ जगहों पर कम हुई हो, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनका बाजार पूरी तरह खत्म हो गया है.

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