
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिला कचहरी में एक अधिवक्ता और बंदर की अनोखी दोस्ती इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब पांच साल से एक बंदर रोजाना अधिवक्ता महेश यादव के चेंबर में रोटी लेने पहुंचता है। दोनों के बीच इतना अपनापन हो गया है कि बंदर को अपने इस खास दोस्त के पास पहुंचने का इंतजार रहता है।
बताया जाता है कि बंदर कभी अधिवक्ता की मेज पर बैठकर रोटी मिलने का इंतजार करता है, तो कभी उनकी जेब में रोटी तलाशने लगता है। जैसे ही उसे रोटी मिलती है, वह उसे लेकर वहां से चला जाता है। अधिवक्ता भी अपने इस बेजुबान दोस्त का खास ख्याल रखते हैं और रोज उसके लिए रोटी रखते हैं।
30 साल से वकालत कर रहे हैं महेश यादव
अधिवक्ता महेश यादव पिछले करीब 30 वर्षों से वकालत कर रहे हैं। वह पहले सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। रोजाना की तरह जब वह जिला कचहरी में अपने चेंबर में बैठते हैं, तो उनका यह खास मेहमान भी उनसे मिलने पहुंच जाता है।
कई बार बंदर सीधे उनकी मेज पर आकर बैठ जाता है और चुपचाप रोटी मिलने का इंतजार करता है। महेश यादव भी प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हैं और उसे रोटी खिलाते हैं। कभी-कभी बंदर उनकी जेब टटोलकर रोटी निकालने की कोशिश भी करता है।
वकील नहीं आते, तब भी चेंबर के आसपास मंडराता है बंदर
इस अनोखी दोस्ती की सबसे खास बात यह है कि यह रिश्ता कुछ दिनों या महीनों का नहीं, बल्कि करीब पांच साल पुराना बताया जा रहा है। अगर किसी वजह से महेश यादव कचहरी नहीं पहुंचते, तब भी बंदर उनके चेंबर के आसपास मंडराता रहता है।
अगले दिन जैसे ही अधिवक्ता कचहरी पहुंचते हैं, बंदर फिर उनके पास आ जाता है। उसकी यह आदत देखकर आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह जाते हैं।
कचहरी के व्यस्त माहौल में बेजुबान दोस्ती की चर्चा
जिला कचहरी जैसे व्यस्त माहौल में अधिवक्ता और बंदर का यह अपनापन लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला देता है। इंसान और जानवर के बीच बने इस अनोखे रिश्ते को देखकर लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
यह कहानी बताती है कि प्यार और अपनापन केवल इंसानों तक सीमित नहीं होता। कभी-कभी बेजुबान जानवर भी अपने व्यवहार से ऐसा रिश्ता बना लेते हैं, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में जगह बना लेता है।



