TrendingUttar Pradesh

​EVM पर मायावती के सवाल से गरमाई यूपी की सियासत… बोलीं- वोट को लेकर मतदाता के मन में नहीं रहना चाहिए संदेह

​EVM पर मायावती के सवाल से गरमाई यूपी की सियासत… बोलीं- वोट को लेकर मतदाता के मन में नहीं रहना चाहिए संदेह

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और VVPAT व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। मायावती ने कहा कि बसपा शुरुआत से ही EVM के जरिए मतदान कराए जाने का विरोध करती रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता के मन में अपने वोट को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए।

मायावती ने कहा कि यदि किसी मतदाता को यह आशंका हो कि उसका वोट उसकी पसंद के उम्मीदवार के बजाय किसी दूसरे प्रत्याशी के खाते में दर्ज हो गया है, तो इससे चुनाव प्रक्रिया और लोगों के भरोसे पर असर पड़ सकता है। उन्होंने EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग रखी।

VVPAT को लेकर भी उठाए सवाल

मायावती ने कहा कि EVM को लेकर आपत्तियों के बाद बसपा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनके मुताबिक, EVM व्यवस्था को खत्म करने के बजाय VVPAT व्यवस्था लागू की गई।

बसपा प्रमुख ने दावा किया कि सभी VVPAT पर्चियों की गिनती नहीं होने के कारण EVM में दर्ज मतों का पूरी तरह मिलान नहीं हो पाता। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मशीनों में छेड़छाड़ और उन्हें दूर से हैक किए जाने की आशंका भी जताई। ये मायावती की ओर से उठाई गई आपत्तियां और दावे हैं।

भाजपा के पुराने EVM विरोध का किया जिक्र

मायावती ने कहा कि देश में शुरुआती चुनावों के बाद करीब पांच दशक तक बैलेट पेपर से मतदान कराया गया। उन्होंने दावा किया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा ने भी EVM को लेकर सवाल उठाए थे और गड़बड़ी के आरोप लगाए थे।

उन्होंने सवाल किया कि केंद्र की सत्ता में आने के बाद भाजपा ने EVM व्यवस्था को खत्म करने के बजाय इसे जारी क्यों रखा।

चंद्रशेखर आजाद की जीत पर भी उठाए सवाल

मायावती ने नगीना लोकसभा सीट से आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद की जीत का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त जनसमर्थन नहीं होने के बावजूद उन्हें भाजपा की साजिश और EVM में गड़बड़ी के जरिए चुनाव जिताया गया। मायावती ने दावा किया कि ऐसा बसपा को नुकसान पहुंचाने और उसके वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए किया गया।

इन आरोपों को मायावती का राजनीतिक दावा बताते हुए देखा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टिंग में भी उनके बयान को आरोप के रूप में ही दर्ज किया गया है।

मायावती ने चंद्रशेखर आजाद की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों से जुड़े मामलों में अधिकारियों से बातचीत करने के बजाय धरनाप्रदर्शन की राजनीति की जाती है।

दलित युवाओं को प्रदर्शन के दौरान सावधान रहने की सलाह

मायावती ने दलित समाज के युवाओं को प्रदर्शन और आंदोलनों के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कई बार युवाओं को आंदोलनों में आगे कर दिया जाता है और बाद में उनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि मुकदमे दर्ज होने के बाद युवाओं को लंबे समय तक कोर्टकचहरी के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं और इससे आगे चलकर सरकारी नौकरी में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मायावती ने दलित समाज से ऐसे मामलों में सावधानी बरतने की अपील की।

SIR को लेकर भ्रम दूर करने की मांग

मायावती ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर जो भ्रम फैलाए जा रहे हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने को जरूरी बताया।

उत्तर प्रदेश में SIR2026 से संबंधित मतदाता सूची और दावेआपत्तियों की प्रक्रिया निर्वाचन विभाग के स्तर पर चल रही है। लखनऊ जिला निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल पर SIR2026 से जुड़ी सूचनाएं और मतदाता सूची संबंधी विवरण उपलब्ध हैं।

दिल्लीपंजाब की कानूनव्यवस्था पर भी बोलीं

मायावती ने दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में अलगअलग मुद्दों को लेकर कानूनव्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने संबंधित राज्य सरकारों से कानूनव्यवस्था में सुधार के लिए उचित कदम उठाने की बात कही और इसे जनहित के लिए जरूरी बताया।

ः

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply