कल यानी 30 सितंबर 2026 से शेयर बाजार में एक बड़ा फेरबदल लागू होने वाला है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 में देश का सबसे पुराना एक्सचेंज बीएसई शामिल होने जा रहा है. इसके साथ ही आईटी सेक्टर की मशहूर कंपनी विप्रो की इस प्रमुख इंडेक्स से छुट्टी हो जाएगी. ये अहम बदलाव बाजार के सेमीएन्युअल इंडेक्स रीबैलेंसिंग का हिस्सा है. इस फैसले का सीधा असर इन दोनों कंपनियों के शेयरों में होने वाले निवेश पर पड़ेगा, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है.

मार्केट कैप बनी बदलाव की मुख्य वजह
बीएसई को निफ्टी 50 में जगह मिलने की सबसे बड़ी वजह इसका लगातार बढ़ता मार्केट कैप है. पिछले छह महीनों के आंकड़ों पर गौर करें तो बीएसई का एवरेज फ्रीफ्लोट मार्केट कैप 1,40,879 करोड़ रुपये रहा है. ये आंकड़ा विप्रो के 55,930 करोड़ रुपये के मार्केट कैप से कम से कम डेढ़ गुना ज्यादा है. नियमों के मुताबिक नई कंपनी का मार्केट कैप बाहर होने वाली सबसे छोटी कंपनी से ज्यादा होना चाहिए. इसी शर्त को पूरा करने की वजह से एनएसई ने अगस्त में बीएसई को इंडेक्स में शामिल करने का ऐलान किया था.
निवेश के फ्लो पर पड़ेगा असर
निफ्टी 50 में शामिल होने से बीएसई को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. एक्सिस कैपिटल के अनुमान के मुताबिक बीएसई में करीब 657 मिलियन डॉलर का निवेश आ सकता है. माना जा रहा है कि पैसिव इंडेक्स फंड्स बीएसई के लगभग 1.57 करोड़ शेयर खरीद सकते हैं. दूसरी तरफ विप्रो को इंडेक्स से बाहर होने का नुकसान झेलना पड़ेगा. कंपनी से 225 मिलियन डॉलर की निकासी होने की पूरी आशंका है. इसका मतलब है कि इंडेक्स फंड्स विप्रो के करीब 11.42 करोड़ शेयर बेच सकते हैं. वैसे भी विप्रो के शेयरों पर दबाव बना हुआ है. इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक इसके शेयर 40 फीसदी टूट चुके हैं.
ब्रोकरेज फर्म्स की मिलीजुली प्रतिक्रिया
बीएसई के शेयरों के भविष्य को लेकर बाजार के जानकारों की अलगअलग राय है. अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ने बीएसई को ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है. उन्होंने इसका टारगेट प्राइस 4,000 रुपये तय किया है. ये बीएसई के पिछले क्लोजिंग प्राइस 3,191.50 रुपये से 25 फीसदी से ज्यादा का मुनाफा दिखा रहा है. मैक्वेरी का मानना है कि कंपनी की कमाई में शानदार ग्रोथ हो सकती है.
हालांकि जेफरीज ने चिंता जताते हुए इसे 2,940 रुपये के टारगेट के साथ ‘अंडरपरफॉर्म’ कॉल दी है. जेफरीज ने एसटीटी में बढ़ोतरी, आरबीआई के बैंक गारंटी नियमों जैसे जोखिमों की तरफ इशारा किया है. वहीं नुवामा ने पिछले महीने अपनी रेटिंग घटाकर ‘होल्ड’ कर दी थी. नुवामा ने टारगेट प्राइस 4,090 रुपये से घटाकर 3,240 रुपये कर दिया है. उनका मानना है कि नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से ट्रेडर्स के बीच काफी कन्फ्यूजन पैदा हुआ है, जिससे भागीदारी कम हुई है.
निफ्टी नेक्स्ट 50 में होंगे कई उलटफेर
निफ्टी 50 के अलावा निफ्टी नेक्स्ट 50 इंडेक्स में भी कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. निफ्टी 50 से बाहर होने वाली विप्रो अब इस इंडेक्स का हिस्सा बनेगी. इसके साथ पॉलीकैब इंडिया, वेदांता एल्युमिनियम मेटल, हिताची एनर्जी इंडिया जैसी अहम कंपनियां भी शामिल होने की रेस में आगे हैं. वहीं दूसरी ओर इंडियन होटल्स कंपनी, आरईसी, श्री सीमेंट, यूनाइटेड स्पिरिट्स समेत लोढ़ा डेवलपर्स को इस लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा.
फिलहाल शेयर बाजार पर ग्लोबल टेंशन का असर भी साफ दिख रहा है. चॉइस ब्रोकिंग के एनालिस्ट हितेश टेलर के मुताबिक अमेरिकाईरान बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर के पार पहुंच गया है. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार का मूड बिगाड़ रही है, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से थोड़ा सहारा मिल सकता है. बाजार में उतारचढ़ाव बने रहने की पूरी संभावना है.



