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​रात की बिगड़ी दिनचर्या से बढ़ सकता है दिल की बीमारी का खतरा, महिलाओं के लिए मेनोपॉज के बाद ज्यादा सावधानी जरूरी

​रात की बिगड़ी दिनचर्या से बढ़ सकता है दिल की बीमारी का खतरा, महिलाओं के लिए मेनोपॉज के बाद ज्यादा सावधानी जरूरी

लखनऊः विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य में ‘दिल की सुनो, सेहत चुनो’ विषय पर ऑनलाइन स्वास्थ्य परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम आरोग्य भारती महिला कार्य और टीआरसी पीजी कॉलेज एवं डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी, बाराबंकी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रजनी द्वारा प्रस्तुत भगवान धनवंतरी स्तवन से हुई। परिचर्चा में विशेषज्ञों ने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, शारीरिक सक्रियता और संतुलित जीवनशैली के महत्व पर चर्चा की।

जैविक घड़ी का हृदय स्वास्थ्य से संबंध

मुख्य वक्ता एचआईएमएस सीतापुर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कांत मिश्रा ने हृदय स्वास्थ्य में शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी यानी ‘सर्कैडियन रिदम’ की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सर्कैडियन रिदम करीब 24 घंटे का प्राकृतिक चक्र है, जो सूरज की रोशनी और अंधेरे के अनुरूप शरीर में हार्मोन्स के नियमन में भूमिका निभाता है। सुबह की रोशनी के संपर्क में शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्राव होता है, जो शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है, जबकि रात में मेलाटोनिन विश्राम और नींद से जुड़ा होता है।

डॉ. मिश्रा के अनुसार, देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, नाइट शिफ्ट तथा अनियमित दिनचर्या से यह प्राकृतिक चक्र प्रभावित हो सकता है। लंबे समय में इसका संबंध हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से हो सकता है। उन्होंने लोगों को प्राकृतिक दिनचर्या अपनाने और सुबह धूप लेने की सलाह दी।

मेनोपॉज के बाद महिलाओं को दिल का खास ख्याल रखने की जरूरत

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आरोग्य भारती के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं आईमेड हेल्थ केयर, वाराणसी के निदेशक डॉ. इन्द्रनील बसु ने महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष चर्चा की।

उन्होंने बताया कि मेनोपॉज से पहले एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के हृदय की प्राकृतिक सुरक्षा में भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में हृदय संबंधी समस्या होने पर हमेशा सीने में दर्द ही प्रमुख लक्षण नहीं होता। थकान, सांस फूलना, पीठ या जबड़े में दर्द जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।

डॉ. बसु ने बताया कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ता है और यह पुरुषों के बराबर पहुंच सकता है। उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित पोषण, शारीरिक सक्रियता और पर्याप्त नींद पर जोर दिया।

आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पर भी हुई चर्चा

आरोग्य भारती के प्रांत अध्यक्ष डॉ. एस. पी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आधुनिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से हृदय रोगों से बचाव के उपाय बताए। उन्होंने अर्जुन की छाल पर अपने वर्षों के शोध अनुभव भी साझा किए।

व्याख्यान के बाद प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछे, जिनका समाधान किया गया। टीआरसी पीजी कॉलेज एवं डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी, बाराबंकी के प्रबंधक डॉ. रंजन मिश्रा ने आरोग्य भारती के मंच और सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया।

ये लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संयोजक संग्राम, प्रांत सह संयोजिका डॉ. संगीता शर्मा, कार्यालय प्रमुख डॉ. अजीत सिंह, महिला कार्य से जुड़ीं रोली शंकर, डॉ. अंजना, नीलम मिश्रा और अंजली समेत कॉलेज के प्राचार्य गिरजाशंकर, आदेश, अनुप्रिया, अन्य प्राध्यापक, विद्यार्थी तथा काशी और अवध प्रांत के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के पाठ के साथ हुआ।

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