
विदेश में रहने पर वहां की दिनचर्या और जीवनशैली कई बार भारतीयों को काफी अलग नजर आती है। अमेरिका में रह रहीं भारतीय कंटेंट क्रिएटर सारिका यादव ने भी अपने अनुभव के आधार पर वहां के कुछ लोगों की दिनचर्या के बारे में बताया है। उनका कहना है कि उनके कुछ अमेरिकी दोस्तों का डिनर और सोने का समय भारतीयों की अपेक्षा काफी जल्दी है।
सारिका ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने अपने अमेरिकी दोस्तों को अपनी दिनचर्या के बारे में बताया तो उन्हें काफी हैरानी हुई।
रात 8 से 10 बजे तक डिनर सुनकर हुए हैरान
सारिका के मुताबिक, वह आमतौर पर रात 8 या 9 बजे तक डिनर कर लेती हैं और कभी-कभी रात 10 बजे तक भी खाना खाती हैं। इसके बाद करीब 12 बजे सोने की उनकी आदत है।
जब उन्होंने अपने अमेरिकी दोस्तों को यह बताया तो उन्हें यह रूटीन काफी देर वाला लगा। इसके बाद सारिका को अपने दोस्तों की दिनचर्या के बारे में पता चला, जो उनके लिए भी काफी अलग अनुभव था।
उनके अनुसार, कुछ लोग शाम करीब 6 से 6:30 बजे के बीच ही डिनर कर लेते हैं और रात करीब 8:30 बजे तक सोने चले जाते हैं। सुबह उठने का समय भी काफी जल्दी बताया गया, जो कई लोगों के लिए सुबह 4 से 5 बजे के बीच होता है।
सुबह जल्दी शुरू होता है दिन
सारिका ने बताया कि उनके अनुभव के अनुसार कुछ जगहों पर कामकाज भी सुबह जल्दी शुरू हो जाता है। कई दुकानें सुबह 6 या 7 बजे खुल जाती हैं और कुछ लोग काम पर जाने से पहले ही व्यायाम या दूसरी गतिविधियां पूरी कर लेते हैं।
शाम करीब 4 से 5 बजे तक काम खत्म होने के बाद लोग परिवार के साथ समय बिताने पर ध्यान देते हैं। सारिका ने कहा कि वह भी धीरे-धीरे इस तरह की दिनचर्या अपनाने की कोशिश कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे भारतीय परंपरा से जोड़ा
सारिका की पोस्ट पर भारतीय यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने इस दिनचर्या की तुलना भारत के पारंपरिक जीवन से की।
कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत के गांवों और छोटे शहरों में आज भी कई लोग सुबह जल्दी उठने और रात में जल्दी सोने की दिनचर्या का पालन करते हैं। कुछ लोगों ने सुबह जल्दी उठने की भारतीय धार्मिक परंपरा ‘ब्रह्म मुहूर्त’ का भी जिक्र किया।
हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि अमेरिका में हर व्यक्ति की दिनचर्या एक जैसी नहीं होती। न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों और दूसरे इलाकों में काम, परिवार, सामाजिक जीवन और व्यक्तिगत पसंद के कारण सोने-जागने का समय काफी अलग हो सकता है।
सारिका द्वारा साझा किया गया अनुभव उनके परिचित लोगों और उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है, इसलिए इसे पूरे अमेरिका की सामान्य दिनचर्या नहीं माना जा सकता।



