नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय तीरंदाज चिकिथा तनिपार्थी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी इस उपलब्धि के बाद खुशी का माहौल है, लेकिन जीत के बाद चिकिथा भावुक भी नजर आईं। उन्होंने अपनी सफलता को अपने पिता के सपने से जोड़ते हुए कहा कि उनके लिए यह पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि पिता के सपने को पूरा करने का भावनात्मक पल है।

चिकिथा ने प्रतियोगिता में अपने आत्मविश्वास और शानदार निशानेबाजी से प्रभावित किया। लगातार दबाव के बीच उन्होंने धैर्य बनाए रखा और भारत के खाते में दो स्वर्ण पदक जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
पिता के सपने को बनाया अपनी ताकत
जीत के बाद चिकिथा ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने और देश के लिए पदक जीतने के लिए प्रेरित किया। पिता के सपने को पूरा करना उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक रहा।
दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद भावुक चिकिथा ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, कोच और उन सभी लोगों को दिया, जिन्होंने उनके सफर में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए बेहद खास है और इसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।
एशियन गेम्स में भारत का बढ़ा गौरव
चिकिथा तनिपार्थी के दो स्वर्ण पदकों ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय तीरंदाजी की मजबूत मौजूदगी को भी रेखांकित किया है। उनकी इस सफलता से देश को बड़ी उम्मीदें मिली हैं और युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह उपलब्धि प्रेरणा का स्रोत बनी है।



