FD Monthly Income: आज के समय में हर कोई सुरक्षित निवेश के साथ रेगुलर इनकम चाहता है. अगर आपके पास 10 लाख रुपये की एकमुश्त रकम है, तो फिक्स्ड डिपॉजिट एक शानदार विकल्प हो सकता है. इसमें आपका पैसा बैंक में सुरक्षित रहता है. साथ ही आपको हर महीने एक तय इनकम भी मिलती रहती है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि 10 लाख की एफडी पर आपको हर महीने कितने रुपये मिलेंगे. इसका सीधा जवाब बैंक की ब्याज दर पर निर्भर करता है. बैंक आपको जितना ज्यादा ब्याज देगा, आपकी हर महीने की कमाई उतनी ही ज्यादा होगी.

ब्याज दर से तय होती है इनकम
बैंकों में एफडी की ब्याज दरें बैंक के प्रकार के साथसाथ समय सीमा के हिसाब से बदलती रहती हैं. अगर आप एसबीआई, एचडीएफसी जैसे बड़े जानेमाने बैंकों में पैसा लगाते हैं, तो वहां आपको कई अवधियों पर करीब 6 से 6.5 प्रतिशत तक का ब्याज मिलता है. वहीं, अगर आप थोड़ा ज्यादा मुनाफा चाहते हैं, तो एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक या जाना स्मॉल फाइनेंस बैंक जैसे छोटे बैंकों का रुख कर सकते हैं. ये बैंक आम बैंकों के मुकाबले ग्राहकों को ज्यादा फायदा दे रहे हैं. इन संस्थाओं में चुनिंदा अवधियों पर ब्याज दर 7 से 8 प्रतिशत तक पहुंच रही है.
10 लाख पर हर महीने की कमाई
अब सीधे मुनाफे के कैलकुलेशन को समझते हैं. मान लीजिए कि आपने 10 लाख रुपये जमा किए हैं. अगर आपको बैंक से 6 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है, तो 10 लाख रुपये पर साल भर का ब्याज करीब 60 हजार रुपये बनेगा. यानी मासिक भुगतान के हिसाब से आपके खाते में हर महीने 5 हजार रुपये आएंगे. अगर ब्याज दर 6.5 प्रतिशत है, तो सालाना ब्याज 65 हजार रुपये होगा और हर महीने 5,417 रुपये मिलेंगे.
अगर ब्याज दर 7 प्रतिशत है, तो सालाना ब्याज 70 हजार रुपये होगा. इस हिसाब से आपको हर महीने करीब 5,833 रुपये मिलेंगे. वहीं 7.5 प्रतिशत की दर पर हर महीने 6,250 रुपये की कमाई होगी. अगर आपको छोटे बैंकों से 8 प्रतिशत का तगड़ा रिटर्न मिलता है, तो सालाना ब्याज 80 हजार रुपये हो जाएगा. ऐसे में हर महीने आपकी कमाई करीब 6,667 रुपये होगी. ये सारे आंकड़े साधारण सालाना ब्याज के आधार पर निकाले गए हैं.
रेगुलर इनकम के लिए सही विकल्प
अगर आपका मकसद हर महीने घर खर्च के लिए पैसे पाना है, तो आपको एफडी चुनते समय खास ध्यान रखना होगा. आपको ऐसी एफडी का चुनाव करना होगा जिसमें ब्याज का भुगतान नियमित तौर पर होता हो. इसमें आप अपनी जरूरत के हिसाब से मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना भुगतान का विकल्प आसानी से चुन सकते हैं. वहीं क्युमुलेटिव एफडी में ब्याज का पैसा बीच में बिल्कुल नहीं मिलता है. वो पैसा सीधे मैच्योरिटी पर आपकी मूल रकम के साथ जुड़कर मिलता है. इसलिए मंथली इनकम सेट करने के लिए नियमित ब्याज भुगतान वाला विकल्प ही सबसे सही रहता है.
टैक्स समेत इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप निवेश से सिर्फ ब्याज का पैसा निकालते हैं, तो आपके मूल 10 लाख रुपये एफडी में पूरी तरह बने रह सकते हैं. ब्याज को हर महीने इनकम के रूप में लिया जा सकता है. मूल रकम आपको मैच्योरिटी पूरी होने पर मिल जाती है. हालांकि, अगर आप समय से पहले एफडी तोड़ते हैं, तो बैंक के प्रीमैच्योर विड्रॉल नियम लागू होते हैं. इससे आपके मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है. एक जरूरी बात ये भी है कि एफडी से मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में गिना जाता है. आपकी कुल आय के हिसाब से आपकी टैक्स देनदारी तय होती है. इसलिए एफडी चुनते समय टैक्स के बाद हाथ में आने वाली रकम का भी हिसाब लगा लेना चाहिए.



