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​डीजल की कीमत पर लगेगी लगाम, G7 देशों के बड़े फैसले से क्या औंधे मुंह गिरेगी कीमतें?

G7 देशों ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सप्लाई की चिंता के बीच रणनीतिक भंडार से 100 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद जारी करने पर सहमति जताई है. इस फैसले में डीजल की सप्लाई को खास प्राथमिकता दी गई है.

​डीजल की कीमत पर लगेगी लगाम, G7 देशों के बड़े फैसले से क्या औंधे मुंह गिरेगी कीमतें?

20 दिनों में डीजल की बड़ी खेप बाजार में

G7 के मुताबिक, रिजर्व से तेल और ईंधन की निकासी तुरंत शुरू होगी और करीब चार महीने तक चलेगी. इसमें पहले 20 दिनों के भीतर डीजल की बड़ी मात्रा बाजार में उतारने की योजना है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और समन्वय करेगी.

अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर

यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं. 2 अक्टूबर को अमेरिका में डीजल की औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन थी, जबकि 22 सितंबर को यह 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी. यूरोप में भी डीजल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.

ट्रंप ने फैसले को बताया तत्काल कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यूरोप अपने बड़े डीजल स्टॉक से भारी मात्रा में ईंधन जारी करने पर सहमत हुआ है और इसकी प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी. इससे अमेरिका में ईंधन की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है.

G7 देशों के बीच ऊर्जा निर्यात पर रोक नहीं

G7 ने यह भी दोहराया है कि सदस्य देशों के बीच ऊर्जा और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा. साथ ही रिफाइनरी मेंटेनेंस कोऑर्डिनेट करने और जहां संभव हो वहां क्षमता का इस्तेमाल बढ़ाने की बात कही गई है.

तेल बाजार पर क्या असर?

घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई. Reuters के अनुसार, दिसंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट करीब 1.1% गिरकर 101.23 डॉलर प्रति बैरल, जबकि WTI 2.3% गिरकर 90.70 डॉलर पर आ गया. यूरोपीय गैसऑयल फ्यूचर्स में भी 7% से ज्यादा की गिरावट आई.

हालांकि, 100 मिलियन बैरल की घोषणा में पहले से किए गए कुछ रिजर्व रिलीज कमिटमेंट शामिल हैं या यह पूरी तरह अतिरिक्त मात्रा है, इस पर बाजार में अभी कुछ स्पष्टता की जरूरत है.

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