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रहस्यमयी लाल झील! जहां जानवरों के शव दिखने लगते हैं पत्थर जैसे, जानिए पानी का अनोखा राज.

रहस्यमयी लाल झील! जहां जानवरों के शव दिखने लगते हैं पत्थर जैसे, जानिए पानी का अनोखा राज.

अफ्रीका में एक ऐसी झील मौजूद है, जिसका रंग देखकर पहली नजर में किसी को भी हैरानी हो सकती है। कभी इसका पानी लाल, कभी गुलाबी तो कभी नारंगी नजर आता है। इस अनोखी झील का नाम लेक नैट्रॉन है और यह उत्तरी तंजानिया में स्थित है।

झील सिर्फ अपने अजीब रंग के लिए ही मशहूर नहीं है। यहां का पानी बेहद खारा और क्षारीय है। इसी वजह से झील में पाए जाने वाले कुछ जीवों के शवों पर नमक और खनिजों की परत जम जाती है। इसके बाद उनके शरीर इतने सख्त और सूखे दिखाई दे सकते हैं कि वे पत्थर की मूर्तियों जैसे नजर आते हैं।

हालांकि, यह कहना सही नहीं है कि झील में गिरते ही हर जानवर पत्थर में बदल जाता है। इसके पीछे एक प्राकृतिक प्रक्रिया काम करती है।

आखिर पानी लाल क्यों दिखाई देता है?

लेक नैट्रॉन का लाल या नारंगी रंग खून की वजह से नहीं है। इसके पीछे झील के पानी में मौजूद खास तरह के सूक्ष्मजीव और साइनोबैक्टीरिया मुख्य भूमिका निभाते हैं।

झील के पानी में नमक और खनिजों की मात्रा काफी अधिक है। जब पानी का वाष्पीकरण होता है तो उसमें मौजूद नमक और दूसरे खनिज और अधिक सघन हो जाते हैं। ऐसे वातावरण में नमक पसंद करने वाले सूक्ष्मजीव और साइनोबैक्टीरिया पनपते हैं।

इन्हीं सूक्ष्मजीवों की वजह से पानी के रंग में लाल, गुलाबी और नारंगी जैसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं। झील के अलग-अलग हिस्सों और पानी की गहराई के अनुसार इसका रंग भी अलग नजर आ सकता है।

इतना खास और कठोर क्यों है यहां का पानी?

लेक नैट्रॉन का पानी सामान्य झीलों से काफी अलग है। इसकी क्षारीयता बहुत अधिक है और इसका pH लगभग 9 से 10.5 के बीच बताया जाता है। कुछ परिस्थितियों में पानी का तापमान भी काफी ज्यादा हो सकता है।

पानी में मौजूद अधिक मात्रा में नमक और अत्यधिक क्षारीय वातावरण इंसानों और ज्यादातर जानवरों के लिए अनुकूल नहीं है। लंबे समय तक ऐसे पानी के संपर्क में रहना नुकसानदायक हो सकता है।

यही असामान्य परिस्थितियां लेक नैट्रॉन को दुनिया की सबसे अनोखी झीलों में शामिल करती हैं।

जानवरों के शव पत्थर जैसे कैसे दिखते हैं?

झील में किसी पक्षी या दूसरे जीव की मौत होने के बाद उसका शरीर पानी और आसपास मौजूद खनिजों के संपर्क में आ सकता है। समय के साथ उसके शरीर की सतह पर नमक और खनिजों की परत जमने लगती है।

इस प्रक्रिया के कारण शरीर सूखकर और कठोर होकर ममी जैसी अवस्था में संरक्षित हो सकता है। इसी वजह से झील के आसपास मिले कुछ पक्षियों के शव दूर से देखने पर पत्थर की मूर्तियों जैसे दिखाई देते हैं।

दरअसल, उनके शरीर सचमुच पत्थर में तब्दील नहीं होते। खनिजों के जमाव और शरीर के सूखने की प्रक्रिया उन्हें बेहद कठोर और पत्थर जैसा बना देती है।

फिर फ्लेमिंगो यहां कैसे रह लेते हैं?

इस झील की सबसे दिलचस्प बात यह है कि जहां ज्यादातर जीवों के लिए परिस्थितियां मुश्किल हैं, वहीं लेसर फ्लेमिंगो यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

झील उनके लिए भोजन और प्रजनन के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान है। इसके आसपास बनने वाले छोटे-छोटे नमकीन द्वीप उन्हें घोंसले बनाने के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह देते हैं।

झील के वातावरण में पाए जाने वाले शैवाल और सूक्ष्मजीव भी फ्लेमिंगो के भोजन का हिस्सा बनते हैं। इस तरह जिस वातावरण में कई जीवों के लिए रहना मुश्किल है, वही कुछ खास प्रजातियों के लिए जीवनचक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।

कुदरत का अनोखा रहस्य

लेक नैट्रॉन इस बात का उदाहरण है कि प्रकृति में ऐसे वातावरण भी मौजूद हैं जो पहली नजर में बेहद खतरनाक और रहस्यमयी लगते हैं। लाल रंग का पानी, अत्यधिक खारापन, ऊंची क्षारीयता और खनिजों से कठोर होते जीवों के शव इस झील को बाकी झीलों से बिल्कुल अलग बनाते हैं।

हालांकि, इसके पीछे किसी रहस्यमयी या अलौकिक शक्ति का हाथ नहीं है। झील का रंग और यहां दिखाई देने वाले पत्थर जैसे शव पूरी तरह प्राकृतिक रासायनिक और जैविक प्रक्रियाओं का परिणाम हैं।

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