
उत्तर प्रदेश के संभल से स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां सांप के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे चार साल के बच्चे को एंटी वेनम की जगह एंटी रैबीज इंजेक्शन लगा दिया गया। इसके बाद बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई और उसे गंभीर स्थिति में निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
करीब 10 दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अब बच्चे की हालत में सुधार हुआ है। स्वस्थ होने के बाद जब उसे अस्पताल से घर भेजा गया तो डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ ने फूलों की माला पहनाकर बच्चे को विदाई दी।
घर के आंगन में खेलते समय सांप ने काटा
बताया गया कि बच्चा अपने घर के आंगन में खेल रहा था। खेलते समय उसका कंचा एक गड्ढे में चला गया। उसे निकालने की कोशिश के दौरान वहां मौजूद सांप ने बच्चे को डस लिया।
सर्पदंश के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी तो परिवार उसे इलाज के लिए जिला संयुक्त अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचा। परिवार के मुताबिक, वहां मौजूद फार्मासिस्ट ने बच्चे को डॉक्टर के पास भेजने के बजाय खुद ही इलाज से जुड़ा निर्णय लिया।
परिवार का आरोप है कि बच्चे को सांप के काटने के लिए दिए जाने वाले एंटी वेनम की जगह एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाया गया और कुछ दवाएं देकर उसे घर भेज दिया गया।
घर पहुंचते ही बिगड़ने लगी हालत
अस्पताल से घर लौटने के बाद बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं हुआ। उसकी हालत लगातार खराब होने लगी। इसके बाद परिवार ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
बच्चे की स्थिति गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा। अस्पताल की मेडिकल टीम लगातार बच्चे के इलाज में जुटी रही। परिवार के लोग भी उसकी हालत में सुधार के लिए लगातार प्रार्थना करते रहे।
करीब सात दिन बाद बच्चे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई देने लगे। इसके बाद अगले कुछ दिनों में उसकी हालत और बेहतर होती गई। लगभग 10 दिन बाद बच्चा इतना स्वस्थ हो गया कि उसे अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा सका।
ठीक होने के बाद डॉक्टरों ने दी भावुक विदाई
बच्चे के ठीक होने के बाद जब परिवार उसे अस्पताल से घर लेकर जाने लगा तो डॉक्टरों और स्टाफ ने फूलों की माला पहनाकर उसे विदाई दी। इस दौरान बच्चे के परिवार की आंखों में खुशी और भावुकता दोनों नजर आईं।
परिवार ने निजी अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ का इलाज के दौरान सहयोग करने के लिए आभार जताया।
फार्मासिस्ट पर हुई कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग तक इसकी जानकारी पहुंची। अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट की भूमिका सामने आने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई और उसे निलंबित कर दिया गया।
अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम भी भेजी थी। जांच के बाद फार्मासिस्ट के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई।
परिवार ने सुनाई पूरी आपबीती
बच्चे की मां के मुताबिक, उनके बेटे को सांप ने काटा था और वे इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे थे। वहां उन्हें बताया गया कि बच्चे को सांप ने नहीं काटा है और उसे एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाकर घर भेज दिया गया।
घर पहुंचने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने पर परिवार उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए वेंटिलेटर पर रखा।
परिवार के मुताबिक, कई दिनों के इलाज के बाद बच्चे ने धीरे-धीरे प्रतिक्रिया देना शुरू किया और आखिरकार उसकी हालत में काफी सुधार हो गया। बच्चे के पिता ने भी निजी अस्पताल की मेडिकल टीम और स्टाफ के इलाज के दौरान सहयोग की सराहना की।



