
झारखंड के लोहरदगा से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस महिला को परिवार सात साल पहले मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर चुका था, वही महिला अचानक जिंदा अपने घर लौट आई। इतने वर्षों बाद महिला को सामने देखकर परिवार के लोग कुछ समय के लिए यकीन ही नहीं कर पाए।
मामला लोहरदगा की रहने वाली डफली उरांव से जुड़ा है। करीब सात साल पहले डफली घर से लापता हो गई थीं। उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिसके चलते परिवार ने काफी तलाश करने के बाद पुलिस में गुमशुदगी की सूचना भी दी थी।
कपड़ों की वजह से हुई पहचान में गलती
डफली के लापता होने के कुछ समय बाद इलाके में एक अज्ञात महिला का शव मिला था। परिवार के लोगों को उस महिला के कपड़े दिखाए गए। कपड़े डफली के कपड़ों से मिलते-जुलते थे।
परिवार ने कपड़ों के आधार पर ही उस अज्ञात महिला को डफली समझ लिया। इसके बाद उन्होंने उसे अपनी लापता परिजन मानकर अंतिम संस्कार कर दिया।
परिवार का कहना है कि उन्हें उस समय शव देखने का मौका नहीं मिला था। उन्हें बताया गया था कि शव की स्थिति काफी खराब थी और उसे वहीं दफना दिया गया था। इसके बाद परिवार ने डफली को मृत मान लिया और धीरे-धीरे इस दुख के साथ जीने लगा।
सात साल बाद सामने आया बड़ा सच
परिवार को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस महिला को वे मृत समझ चुके हैं, वह वास्तव में जीवित है और घर से दूर कहीं रह रही है।
सात साल बाद एक सामाजिक संस्था की टीम डफली को लेकर उनके घर पहुंची। संस्था के सदस्य बेसहारा और मानसिक रूप से परेशान लोगों की देखभाल, उपचार और पुनर्वास का काम करते हैं।
बताया गया कि डफली कुछ समय पहले ओडिशा के खुर्दा इलाके में एक संस्था के संपर्क में आई थीं। वहां उनकी देखभाल और उपचार के दौरान उन्होंने अपने घर का पता लोहरदगा के कुटमू के रूप में बताया।
ऐसे खोजा गया परिवार
महिला द्वारा बताए गए पते के आधार पर संस्था के सदस्यों ने उनके परिवार की तलाश शुरू की। जानकारी जुटाने के बाद जब उन्हें परिवार का पता मिला तो टीम डफली को लेकर लोहरदगा पहुंची।
जैसे ही डफली अपने घर पहुंचीं, उनके भाई और मां ने उन्हें पहचान लिया। सात साल बाद बेटी को जिंदा और सामने देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
जिस परिवार ने वर्षों पहले उनके



