
विवाह के बाद बेटी के अधिकार खत्म नहीं हो जाते। इसी अहम पहलू पर हाईकोर्ट ने एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी महिला के अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को केवल इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि उसकी शादी हो चुकी है। कोर्ट ने विभाग की ओर से आवेदन खारिज करने वाले आदेश को निरस्त करते हुए मामले पर दोबारा नियमानुसार विचार करने के निर्देश दिए हैं।
मामला एक महिला के अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन से जुड़ा था। महिला ने अपने परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए संबंधित विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। हालांकि, विभाग ने उसका आवेदन स्वीकार करने के बजाय उसे खारिज कर दिया। इसके बाद महिला ने विभाग के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संबंधित तथ्यों और लागू नियमों पर विचार किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने विभाग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत महिला का आवेदन खारिज किया गया था। कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया कि महिला के आवेदन पर लागू नियमों के अनुसार दोबारा विचार किया जाए और उसके बाद अनुकंपा नियुक्ति को लेकर उचित निर्णय लिया जाए।
इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल महिला के विवाहित होने को उसके आवेदन को खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति का स्वतः अधिकार मिल जाएगा। उसके मामले में लागू नियमों और पात्रता की अन्य शर्तों को ध्यान में रखकर फैसला लेना होगा।
यह निर्णय उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर केवल वैवाहिक स्थिति को आधार बनाकर सवाल उठाए जाते हैं। कोर्ट के निर्देश के बाद अब संबंधित विभाग को इस मामले पर नियमों के अनुसार दोबारा निर्णय लेना होगा।



