
बिहार के दो पूर्व सैनिकों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने और संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों की गिरफ्तारी असम में की गई है। सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट के बाद हुई कार्रवाई से बिहार से लेकर असम तक सुरक्षा तंत्र में हलचल बढ़ गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बेगूसराय निवासी 39 वर्षीय रितेश कुमार सिंह और मोतिहारी निवासी अभिषेक कुमार सिंह के रूप में हुई है। बताया गया है कि दोनों पूर्व सैनिक हैं और सेवानिवृत्ति के बाद अनुबंध के आधार पर सेना से जुड़े हुए थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अभिषेक कुमार सिंह कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स और ISI नेटवर्क के संपर्क में था। उस पर भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचाने का आरोप है। इसमें सैन्य गतिविधियों, जवानों की आवाजाही और रक्षा से जुड़े संवेदनशील ढांचे से संबंधित जानकारी शामिल होने की आशंका जताई गई है।
सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट के आधार पर असम पुलिस की एसटीएफ ने गुवाहाटी के सतगांव इलाके में एक किराए के मकान पर कार्रवाई की। यहां से अभिषेक को पकड़ा गया। इसके बाद जांच के दौरान रितेश कुमार सिंह की भूमिका सामने आई और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, रितेश सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अनुबंध पर काम कर रहा था और उसने अभिषेक की कथित गतिविधियों में मदद की थी। दोनों के बीच संपर्क और उनकी वास्तविक भूमिका की जांच की जा रही है।
मामले में हनीट्रैप का एंगल भी सामने आया है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई गई है कि अभिषेक सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और किस तरह संवेदनशील जानकारी हासिल कर उसे आगे भेजा गया।
छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और संवेदनशील एवं प्रतिबंधित दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियां भी जांच से जुड़ सकती हैं। वहीं, मोतिहारी पुलिस ने भी आरोपी के स्थानीय और स्थायी पते का सत्यापन शुरू कर दिया है। पुलिस असम पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों के संपर्क में रहकर मामले से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ और उनके संपर्कों की जांच जारी है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित जासूसी नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।



