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शेख हसीना से सुलह; की बात करने लगा बांग्लादेश, अचानक बदला रुख या कोई बड़ी रणनीति?

शेख हसीना से सुलह; की बात करने लगा बांग्लादेश, अचानक बदला रुख या कोई बड़ी रणनीति?

ढाका: शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत पर लगातार दबाव बनाने वाले बांग्लादेश के रुख में अचानक बदलाव नजर आया है। कुछ दिन पहले तक जहां बांग्लादेश भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा था, वहीं अब पहली बार उनकी पार्टी अवामी लीग के साथ सुलह की संभावना पर बात की गई है। हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें भी रखी गई हैं।

बांग्लादेश सरकार के प्रधानमंत्री के सूचना सलाहकार जाहिद उर रहमान ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अवामी लीग के सक्रिय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ सुलह की पहल करना गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी पहल होती है तो इसे सकारात्मक कदम माना जा सकता है।

उनके मुताबिक, सुलह की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मध्यस्थों को अवामी लीग से संपर्क करना चाहिए और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत के जरिए आगे की राह तैयार करनी होगी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि शेख हसीना के नेतृत्व वाली पार्टी को पहले अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस प्रक्रिया की शुरुआत के लिए आगे आना होगा।

तीन दिन पहले तक प्रत्यर्पण की मांग

बांग्लादेश के इस बदले रुख को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कुछ दिन पहले तक वहां की सरकार का पूरा जोर शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर था। बांग्लादेश की ओर से भारत से उनकी वापसी की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की गई थी।

बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने भी कहा था कि शेख हसीना की वापसी के लिए कानूनी प्रक्रिया के साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना को वापस लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

अचानक सुलह की बात क्यों?

अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कुछ ही दिनों में बांग्लादेश के रुख में इतना बड़ा बदलाव क्यों आया? क्या यह वास्तव में राजनीतिक सुलह की कोशिश है या इसके पीछे कोई रणनीति है?

बांग्लादेश में शेख हसीना को गंभीर मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें मौत की सजा भी सुनाई गई है। उनके खिलाफ छात्र आंदोलन के दौरान हिंसक कार्रवाई और मानवता के खिलाफ अपराध जैसे आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में अगर वह बांग्लादेश लौटती हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का खतरा बना रहेगा।

यही वजह है कि अवामी लीग के साथ सुलह की बात सामने आने के बाद इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह पहल वास्तव में राजनीतिक समझौते की दिशा में बढ़ेगी या केवल बातचीत तक सीमित रहेगी।

भारत का क्या है रुख?

जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर भारत आना पड़ा था। तब से वह भारत में हैं। इसके बाद से बांग्लादेश कई बार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है।

भारत की ओर से कहा गया है कि इस मामले में कानूनी प्रक्रियाओं और संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। ऐसे में बांग्लादेश के बदले हुए रुख के बीच अब यह देखना अहम होगा कि दोनों देशों के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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