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​तेजी से कम हो रहा इमरजेंसी के लिए रखा तेल, कौन सा देश कर रहा सबसे ज्यादा खर्च, क्या भारत डरे?

दुनिया के पास तेल का आपातकालीन बफर तेजी से खत्म होता जा रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्धों और सप्लाई में रुकावट के बीच सरकारों और कंपनियों ने अपने स्टॉक से 1 अरब बैरल से ज्यादा तेल निकाल लिया है. अब दुनिया में कमर्शियल इन्वेंट्री के तौर पर 6 अरब बैरल से भी कम तेल बचा है और उसमें से भी सिर्फ 10 प्रतिशत या उससे कम तेल ही ऐसा है जो तुरंत इस्तेमाल के लिए उपलब्ध है.

​तेजी से कम हो रहा इमरजेंसी के लिए रखा तेल, कौन सा देश कर रहा सबसे ज्यादा खर्च, क्या भारत डरे?

यानी बाजार के पास अब झटका सहने की गुंजाइश बहुत कम रह गई है. अगर कोई नया सप्लाई संकट आता है, तो तेल बाजार उसके असर के प्रति बेहद कमजोर साबित हो सकता है और कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव पहले से ही बढ़ रहा है. इस खबर के आसरे से आइए समझते हैं कि दुनिया में आखिर डेली तेल की खपत कितनी होती है. भारत के लोग कितना खर्च कर देते हैं और सबसे जरूरी कि टोटल तेल भंडार का क्या हिसाबकिताब है.

कहांकहां खर्च होता है तेल

दुनिया में डेली तेल की खपत

पहली बात जो संकट को समझने से पहले जाननी होगी वह यह है कि रिपोर्ट में इमरजेंसी तेल के स्टॉक पर बात हुई है. न कि कुल तेल भंडार की. अभी दुनिया के पास तेल का कुल भंडार पर्याप्त है. डेटा के मुताबिक, पूरी दुनिया में हर दिन लगभग 103 से 105 मिलियन यानी 10.3 से 10.5 करोड़ बैरल तेल की खपत होती है. प्रति व्यक्ति औसत निकालें तो यह रोज लगभग 0.53 अमेरिकी गैलन बैठता है यानी करीब 2.5 लीटर प्रति व्यक्ति होगा.

किस चीज में कितना तेल जाता है

  1. इस कुल खपत में सबसे बड़ा हिस्सा डीजल का है. EIA के डेटा के मुताबिक, डीजल और गैसऑयल की रोज की खपत करीब 28.7 से 29 मिलियन बैरल है, जो कुल मांग का लगभग 27 से 28 प्रतिशत बैठती है. इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जा सकता है, क्योंकि भारी मशीनें, लंबी दूरी के ट्रक, मालवाहक जहाज़, खेती के ट्रैक्टर और सार्वजनिक परिवहन, सब इसी पर चलते हैं.
  2. दूसरे नंबर पर पेट्रोल यानी मोटर गैसोलीन है. IEA के डेटा के मुताबिक इसकी रोजाना खपत लगभग 26.5 से 27 मिलियन बैरल है और हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत. यह मुख्य रूप से निजी कारों, मोटरसाइकिलों और हल्के ट्रकों में इस्तेमाल होता है. पश्चिमी देशों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चलन से इसकी मांग की बढ़त थम गई है, लेकिन दुनिया भर में पेट्रोल की मांग अब भी ऊंची बनी हुई है. डीजल और पेट्रोल मिलकर परिवहन में इस्तेमाल होने वाली रिफाइंड ऊर्जा का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा हैं.
  3. तीसरा बड़ा हिस्सा पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक का है, यानी ईथेन, LPG और नैफ्था जैसे उत्पाद. statista.com के मुताबिक, इनकी रोज की खपत 14.5 से 16 मिलियन बैरल है, जो कुल मांग का 14 से 15 प्रतिशत है. इनसे प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, पैकेजिंग और औद्योगिक रसायन बनते हैं. फिलहाल यही क्षेत्र वैश्विक तेल मांग का सबसे तेजी से बढ़ता स्रोत है.
  4. चौथे नंबर पर जेट फ्यूल और केरोसिन है. एनर्जी इंटेलीजेंस के मुताबिक, इसकी रोज की खपत करीब 7.8 से 8 मिलियन बैरल है, यानी लगभग 7.5 प्रतिशत हिस्सेदारी. विमानन क्षेत्र महामारी से पहले की बढ़त की राह पर पूरी तरह लौट चुका है और यही ईंधन यात्री विमानों और एयरकार्गो नेटवर्क को चलाता है.

बाकी लगभग 25 मिलियन बैरल रोज में रेजिडुअल फ्यूल ऑयल, डामर और ल्यूब्रिकेंट जैसे उत्पाद आते हैं, जिनसे बड़े समुद्री जहाज चलते हैं, सड़कें बनती हैं और इंजनों को चिकनाई मिलती है.

सबसे ज्यादा तेल कौन खर्च करता है

कौन सा देश कितना तेल खर्च करता है

देशों के लिहाज से देखें तो अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जहां रोज लगभग 20.3 से 20.6 मिलियन बैरल तेल खर्च होता है. दूसरे नंबर पर चीन है, जिसकी खपत 16.2 से 16.4 मिलियन बैरल रोज़ है. भारत 5.3 से 5.6 मिलियन बैरल रोज की खपत के साथ तीसरे स्थान पर है. लीटर में बात करें तो भारत में रोज करीब 92 करोड़ लीटर तेल इस्तेमाल होता है.

कितना भंडार बचा है, कब तक चलेगा

अब सवाल यह है कि क्या दुनिया में तेल खत्म होने वाला है. Worldometers के मुताबिक, दुनिया में कच्चे तेल का कुल प्रमाणित भंडार लगभग 1.57 से 1.76 ट्रिलियन बैरल है, यानी करीब 1,57,000 से 1,76,000 करोड़ बैरल. अगर खपत की मौजूदा रफ्तार यही रही, तो यह भंडार लगभग 57 साल तक चल सकता है.

इस भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा वेनेज़ुएला के पास है, जहां 30,300 करोड़ बैरल तेल है. हालांकि, वहां का तेल भारी किस्म का है, इसलिए उसे निकालना महंगा पड़ता है. दूसरे नंबर पर सऊदी अरब है, जिसके पास 26,700 करोड़ बैरल का भंडार है और जहां तेल निकालना दुनिया में सबसे आसान और सस्ता माना जाता है. इसके बाद ईरान के पास 20,800 करोड़ बैरल और इराक के पास 14,500 करोड़ बैरल तेल है.

किसके पास कितना तेल है

नए भंडारों की खोज कहां तक पहुंची

तेल की खोज भी लगातार जारी है. S&P ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल लगभग 130 से ज्यादा बड़े पारंपरिक तेल भंडार खोजे जाते हैं. इनमें से करीब 70 प्रतिशत नए संसाधन समुद्र के नीचे, यानी ऑफशोर इलाकों में मिल रहे हैं. नई खोजों में लैटिन अमेरिका सबसे आगे है, खासकर ब्राजील और गुयाना इसमें कमाल कर रहे हैं.

क्या भारत को डरने की जरूरत है

भारत के लिए यह स्थिति चिंता की हो सकती है. चिंता इसलिए क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. जब वैश्विक बफर इतना कम हो जाए, तो कोई भी नया झटका कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ा सकता है और इसका सीधा असर पेट्रोलडीजल की कीमतों, माल ढुलाई की लागत और महंगाई पर पड़ सकता है.

कुल मिलाकर घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है. असली जोखिम तेल की कमी का नहीं, बल्कि कीमतों में उछाल और सप्लाई में रुकावट का है. ऐसे में भारत के लिए अपना रणनीतिक तेल भंडार मजबूत करना, तेल आपूर्ति के लिए अलगअलग देशों से रिश्ते बनाए रखना और वैकल्पिक ऊर्जा पर ध्यान देना पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गया है.

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