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मुंबई: 2,805 फर्जी ऐप्स से 9,673 लोगों को बनाया निशाना, 150 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा.

मुंबई: 2,805 फर्जी ऐप्स से 9,673 लोगों को बनाया निशाना, 150 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा.

मुंबई: साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें 2,805 फर्जी ऐप्स के जरिए 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए करीब 150 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई। आरोपियों ने सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं से जुड़े नामों का इस्तेमाल कर लोगों को फर्जी एपीके फाइलें भेजीं और उन्हें मोबाइल में इंस्टॉल करवाने की कोशिश की।

जांच में सामने आया कि फर्जी ऐप्स के नाम ऐसे रखे जाते थे, जिससे लोगों को उन पर भरोसा हो जाए। इनमें पेंशन कार्ड वेरिफिकेशन, सीनियर सिटीजन कार्ड, आरटीओ चालान और क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन जैसे नाम शामिल थे। इन ऐप्स के जरिए मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी और ओटीपी तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती थी।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर फर्जी ऐप बनाने लगा आरोपी

जांच के दौरान एक आरोपी के बारे में पता चला कि उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई दूसरे वर्ष में छोड़ दी थी। शुरुआत में वह गेमिंग ऐप बनाने का काम करता था। इसी दौरान उसने एपीके फाइल तैयार करने की तकनीक सीखी और बाद में साइबर अपराधियों के संपर्क में आ गया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी करीब तीन साल से इस नेटवर्क से जुड़ा था और साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी ऐप तैयार करके उन्हें दूसरे आरोपियों तक पहुंचाता था।

72 साल के बुजुर्ग से 5.62 लाख रुपये की ठगी

पूरे नेटवर्क का पता एक 72 वर्षीय बुजुर्ग से हुई साइबर ठगी की जांच के दौरान चला। मामले में ठगों ने खुद को बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर बुजुर्ग से संपर्क किया और सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने के नाम पर व्हाट्सऐप के जरिए एक एपीके फाइल भेजी।

फाइल मोबाइल में इंस्टॉल करने के बाद आरोपियों ने फोन और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की। इसके बाद बुजुर्ग के बैंक खाते से 5.62 लाख रुपये निकाल लिए गए।

2,805 ऐप्स के इस्तेमाल की जांच जारी

मामले की जांच आगे बढ़ने पर फर्जी ऐप तैयार करने और उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क की जानकारी सामने आई। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 2,805 फर्जी ऐप्स का इस्तेमाल किन-किन मामलों में किया गया और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे।

पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। लोगों को सलाह दी जाती है कि अनजान नंबरों से आने वाली एपीके फाइलों को मोबाइल में इंस्टॉल न करें, खासकर तब जब उन्हें बैंक, सरकारी योजना, पेंशन या किसी वेरिफिकेशन के नाम पर भेजा गया हो।

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