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बुजुर्ग दंपती और ‘नौकरानी’ की दिनदहाड़े हत्या, अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता.

बुजुर्ग दंपती और ‘नौकरानी’ की दिनदहाड़े हत्या, अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता.

रायपुर क्षेत्र की विष्णु लोक कॉलोनी में बुजुर्ग दंपती और उनकी नौकरानी की दिनदहाड़े हत्या ने शहर में अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद शांत और सुरक्षित जीवन की तलाश में देहरादून आने वाले बुजुर्गों के लिए अब घर की सुरक्षा भी बड़ी चिंता बनती जा रही है।

शहर की कई पुरानी कॉलोनियों में बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग रहते हैं, जिनके बच्चे नौकरी, कारोबार या अन्य कारणों से दूसरे शहरों और विदेशों में रहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ रोजमर्रा के कामों के लिए उन्हें घरेलू सहायकों, माली, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, दूधवाले और अन्य बाहरी लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है। यही स्थिति कई बार अपराधियों को घर तक पहुंचने का मौका दे सकती है।

विष्णु लोक की हालिया घटना में पुलिस के अनुसार, एक युवक लूट के इरादे से घर में दाखिल हुआ था। घटना में बुजुर्ग दंपती और उन्हें बचाने पहुंची नौकरानी की हत्या कर दी गई। इस वारदात ने शहर में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

पहले भी अकेले रह रहे बुजुर्ग बने निशाना

देहरादून में बुजुर्गों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। चार सितंबर को डालनवाला क्षेत्र में घर में अकेली रहने वाली एक बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी गई थी। जांच में घरेलू नौकर की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस के अनुसार, रुपये के लेनदेन के विवाद में महिला की हत्या की गई थी।

मार्च 2023 में भंडारीबाग क्षेत्र में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या का मामला भी सामने आया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी किरायेदार बनने के बहाने घर में दाखिल हुआ था। बाद में लूट के प्रयास के दौरान महिला की हत्या कर दी गई। जांच के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली थी।

सितंबर 2020 में कांवली रोड क्षेत्र में घर में अकेले रहने वाले 72 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या की घटना भी सामने आई थी। इन अलग-अलग मामलों में एक समान बात यह रही कि बुजुर्ग घर में अकेले थे और अपराधियों ने उनकी कमजोर सामाजिक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की।

जिले में 453 अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक दर्ज

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कम से कम 453 ऐसे वरिष्ठ नागरिक दर्ज हैं जो अकेले रह रहे हैं। इनमें कई बुजुर्गों के बच्चे दूसरे शहरों या विदेश में रहते हैं।

वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस स्तर पर व्यवस्था भी की गई है। थानाध्यक्षों को अकेले रहने वाले बुजुर्गों से संपर्क करने और उन्हें पुलिस व नियंत्रण कक्ष के जरूरी नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बीट स्तर पर भी उनकी कुशलक्षेम लेने की व्यवस्था रही है।

हालांकि, लगातार सामने आ रही घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि केवल रिकॉर्ड में नाम और फोन नंबर दर्ज करना पर्याप्त है या सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

बुजुर्गों की सुरक्षा में परिवार की भी अहम भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार, दूसरे शहर या विदेश में रहने वाले बच्चों के लिए माता-पिता से नियमित संपर्क बनाए रखना बेहद जरूरी है। केवल आर्थिक मदद भेजना ही पर्याप्त नहीं है। नियमित फोन कॉल के साथ पड़ोसियों और भरोसेमंद लोगों से भी संपर्क बनाए रखना बुजुर्गों के लिए सुरक्षा का अतिरिक्त सहारा बन सकता है।

यदि बुजुर्ग का फोन लगातार नहीं उठ रहा है या उनकी दिनचर्या में अचानक बदलाव दिखता है तो परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद पड़ोसी को तुरंत उनके घर जाकर स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।

घर को अपराधियों के लिए आसान निशाना बनने से कैसे बचाएं

बुजुर्गों को घरेलू सहायक, चालक, माली और अन्य कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराना चाहिए। प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन या किसी सर्विस कर्मचारी को घर में प्रवेश देने से पहले उसकी पहचान और आने का कारण सुनिश्चित करना जरूरी है।

मुख्य दरवाजे पर कैमरा या डोरबेल कैमरा और आपातकालीन अलार्म जैसी सुविधाएं भी मददगार हो सकती हैं। घर में रखी नकदी, जेवर या संपत्ति से जुड़ी जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा करने से बचना चाहिए।

परिवार, भरोसेमंद पड़ोसी और स्थानीय पुलिस के बीच संपर्क बनाए रखना भी अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। देहरादून में सामने आई हालिया घटनाएं संकेत देती हैं कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए परिवार और पुलिस, दोनों स्तर पर लगातार सतर्कता जरूरी है।

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