BusinessIndia

किताब की दुकान से शुरू किया सफर, ऐसे गलगोटिया ने खड़ा किया 3000 करोड़ का कारोबार

किताब की दुकान से शुरू किया सफर, ऐसे गलगोटिया ने खड़ा किया 3000 करोड़ का कारोबार

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के फाउंडर सुनील गलगोटिया

गलगोटिया यूनिवर्सिटी किसी पहचान की मोहताज नहीं है. सिर्फ दिल्ली एनसीआर की ही नहीं बल्कि पूरे नॉर्दन इंडिया की बड़ी यूनिवर्सिटीज में से एक है. वैसे तो ये यूनिवर्सिटी अपने एजुकेशन से जुड़ी चीजों की वजह से चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार बात कुछ खास है. मौजूदा समय में यूनिवर्सिटी अपने रोबोडॉग की वजह से विवादों और चर्चा में आ गई है. खैर इस विवाद पर काफी बातें हो चुकी हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मालिक कौन है? पहले इस यूनिवर्सिटी का मालिक दिल्ली में सिर्फ एक बुक स्टोर चलाता था? आखिर एक बुक स्टोर के मालिक ने कैसे एजुकेशन का कितना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया और अरबों रुपयों की संपत्ति हासिल की.

किस विवाद में फंसी गलगोटिया यूनिवर्सिटी?

मौजूदा समय में गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बड़े विवाद में फंस गई है. वास्तव में दिल्ली में आयोजित एआई समिट में यूनिवर्सिटी ने एक रोबो डॉग प्रदर्शनी के लिए रखा था. यूनिवर्सिटी की ओर से ये दावा किया गया था कि इस रोबो डॉग को यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने बनाया है. जबकि आरोप ये रोबो डॉग चीन का प्रोडक्ट है. सोशल मीडिया में फोटो वायरल होने के बाद ये विवाद और भी ज्यादा गहरा गया. जिसे बाद में यूनि​वर्सिटी की ओर से समिट के स्टॉल से हटा दिया. वैसे अभी तक यू​निवर्सिटी के मैनेज्मेंट की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं है. सभी इसी का इंतजार कर रहे हैं.

कौन है गलगोटिया के फाउंडर

अगर बात गलगोटिया यूनिवर्सिटी के फाउंडर की करें तो उनका नाम सुनील गलगोटिया है. इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 2011 में हुई थी. मौजूदा समय में इसके सीईओ ध्रुव गलगोटिया हैं. जोकि सुनील गलगोटिया के बेटे हैं. ये यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे के पास मौजूद है. जहां पर ग्रेजुएशन लेवल से पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी तक की पढ़ाई होती है. वैसे गलगोटिया परिवार का साम्राज्य इतना बड़ा नहीं था. दिल्ली में गलगोटिया परिवार की एक किताबों की दुकान दी थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 1930 में उनके परिवार की कनॉट प्लेस में ‘ईडी गलगोटिया एंड संस’ नाम से बुक शॉप थी. वहां से इस परिवार ने एजुकेशन का इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया है. जब परिवार की बागडोर सुनील गलगोटिया ने संभाली तो उन्होंने 1980 के दशक में गलगोटिया पब्लिकेशंस शुरूआत की थी.

पैसे उधार लेकर शुरू किया सफर

सुनील गलगोटिया को शुरुआत में काफी संघर्ष भी करना पड़ा. उन्होंने पहली किताब 9000 रुपए उधार लेकर पब्लिश कराई थी. जिसका नाम ‘पावर सिस्टम कंट्रोल एंड स्टैबिलिटी’ (Power System Control and Stability’ था. उसके बाद सुनील को बैरन्स की SAT, TOEFL, GRE और GMAT किताबों के भारत में डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स भी मिल गए और बिजनेस तेजी के साथ आगे बढ़ने लगा.

पहले रखी इंस्टीट्यूटी की नींच

गलगोटिया यहीं नहीं रुके. उन्होंने एजुकेशन सेक्टर में कदम रखा और साल 2000 में सिर्फ 40 स्टूडेंट्स के साथ गलगोटियाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी नींव रखी. उसके बाद इसकी पॉपुलैरिटीज में लगातार इजाफा होता रहा. फिर गलगोटिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग की शुरुआत की गई. अब कहानी थी कुछ बड़ा करने और साल 2011 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई. मौजूदा समय में इस ग्रुप में 40,000 से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं. इस यूनिवर्सिटी में 40 से ज्यादा देशों के स्टूडेंट्स अपनी स्टडी पूरी करने के लिए आ रहे हैं. खास बात तो ये है कि इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई पूरी कर चुके 1 लाख से ज्यादा लोग 96 देशों में नौकरी कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गलगोटिया परिवार ने जो सफर 1 बुक स्टोर से शुरू किया था, वो मौजूदा समय में 3000 करोड़ रुपए के कारोबार के रूप में तब्दील हो चुका है.


google button

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply