Indian Air Force Day 2026: छोटी शुरुआत. सीखते हुए धीरेधीरे आगे बढ़ना. लगातार सीखना. जवानोंअफसरों की संख्या में इजाफा. एक के बाद एक, अनेक अभियानों में शामिल होना और पूरी दुनिया तक अपने पंख फैला लेना. यही भारतीय वायु सेना की खास पहचान है. आज भारतीय वायु सेना का पूरी दुनिया में डंका बजता है. अलगअलग एजेंसियों की रैंकिंग में भी भारतीय वायु सेना टॉप फाइव में ही आती है.

आइए, भारतीय वायु सेना के स्थापना दिवस यानी 8 अक्तूबर के मौके पर जानते हैं कि 4 विमान, 6 अफसर और 19 जवानों के साथ शुरू हुई भारतीय वायुसेना आज कहां खड़ी है? इसके नाम से रॉयल कब हटा?
साल 1932 में रखी गई थी नींव
भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी. उस समय इसका नाम इंडियन एयर फोर्स था. यह ब्रिटिश भारत की वायुसेना के रूप में काम करती थी. इसे ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स की सहायक यूनिट के रूप में भी जानापहचाना जाता था. वायुसेना से जुड़ी वर्दी, बैज और प्रतीक पर भी उस समय ब्रिटिश प्रभाव वर्षों तक था. पहला स्क्वाड्रन स्थापना के अगले साल बना यानी 1 अप्रैल 1933 को इसकी पहली परिचालन इकाई ने काम शुरू किया. इन दोनों तारीखों का फर्क समझना जरूरी है. एक तारीख स्थापना की है और दूसरी पहले स्क्वाड्रन के गठन की.
चार विमान, छह अफसर और 19 वायुसैनिक
1 अप्रैल 1933 को नंबर 1 स्क्वाड्रन का गठन हुआ. शुरुआती दल में चार वेस्टलैंड वापिटी विमान थे. इनके साथ छह प्रशिक्षित अफसर और 19 वायु सैनिक शामिल थे. कई जगह शुरुआती पायलटों की संख्या पांच भी बताई जाती है. वेस्टलैंड वापिटी उस दौर का द्विपंखी विमान था. इसकी बनावट में दो पंखों की परतें होती थीं. आज के आधुनिक लड़ाकू विमानों की तुलना में यह बहुत साधारण था. फिर भी उस समय के लिए यह एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी. छोटे दल को उड़ान, रखरखाव, संचार और सैन्य कामकाज की बुनियादी व्यवस्था खड़ी करनी थी.
पहले स्क्वाड्रन का नेतृत्व ब्रिटिश अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट सेसिल बाउशर ने किया. भारतीय अफसरों और वायु सैनिकों ने धीरेधीरे प्रशिक्षण और संचालन का अनुभव हासिल किया. शुरुआती वर्षों में सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ा. इसी छोटे आधार ने आगे चलकर बड़े संगठन का रूप लिया.
दूसरे विश्वयुद्ध में बदली पहचान
दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना ने बर्मा क्षेत्र में सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया. जापानी सेना की बढ़त रोकने और जमीनी सैनिकों की सहायता जैसे कामों में इसकी भूमिका रही. युद्ध के दौरान वायुसेना का विस्तार हुआ. इसके विमानों और स्क्वाड्रनों की संख्या भी बढ़ी. युद्ध में निभाई गई भूमिका के बाद 1945 में इसे रॉयल उपाधि दी गई. इसके बाद इसका नाम रॉयल इंडियन एयर फोर्स हो गया. यह उपाधि ब्रिटिश राजशाही से जुड़ी थी. नाम में रॉयल जुड़ने के बावजूद भारतीय वायुसेना के कर्मियों की अपनी पहचान और योगदान भी लगातार मजबूत होते गए.
रॉयल शब्द कब हटाया गया?
भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ. इसके बाद भी कुछ समय तक वायुसेना का आधिकारिक नाम रॉयल इंडियन एयर फोर्स रहा. रॉयल शब्द साल 1950 में हटाया गया. यह बदलाव 26 जनवरी 1950 को भारत के गणतंत्र बनने के साथ हुआ. तब देश ने अपना गणतांत्रिक स्वरूप अपनाया और वायुसेना का नाम इंडियन एयर फोर्स यानी भारतीय वायुसेना हो गया. इस बदलाव का अर्थ केवल नाम में एक शब्द हटाना नहीं था. यह भारत की नई राष्ट्रीय पहचान का संकेत था. देश अब ब्रिटिश राजशाही के अधीन नहीं था. उसकी सेनाएं स्वतंत्र गणराज्य की सेनाएं थीं.
8 अक्टूबर की तारीख ही क्यों?
8 अक्टूबर इसलिए वायुसेना दिवस के लिए चुना गया क्योंकि इसी तारीख को 1932 में भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी. दिवस का उद्देश्य स्थापना के दिन को याद करना और वायुसेना के योगदान का सम्मान करना है. इस खास तारीख के पीछे किसी अलग सैन्य घटना या बाद में चुने गए विशेष कारण का उल्लेख नहीं मिलता. इसका सीधा आधार स्थापना की तारीख है. हर साल इस दिन वायुसेना के जवानों, अधिकारियों और पूर्व कर्मियों के योगदान को याद किया जाता है. समारोहों में परेड, सम्मान कार्यक्रम और विमान प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं. आयोजन का स्थान और कार्यक्रम हर साल अलग हो सकते हैं. लेकिन दिन का ऐतिहासिक आधार 8 अक्टूबर 1932 ही है.
आज भारतीय वायु सेना के पास खास जिम्मेदारियां
भारतीय वायुसेना का काम केवल लड़ाकू विमान उड़ाना नहीं है. उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा, सैन्य बलों को हवाई सहायता और जरूरत के समय सैनिकों तथा जरूरी सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना शामिल है. खोज और बचाव अभियान तथा आपदा राहत में भी वायुसेना मदद करती है. बाढ़, भूकंप या अन्य संकट के समय विमान और हेलीकॉप्टर दूरदराज के इलाकों तक पहुंच सकते हैं. वे राहत सामग्री पहुंचाने, लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सेवाओं को सहारा देने में काम आते हैं. ऐसी जिम्मेदारियां दिखाती हैं कि वायुसेना का योगदान युद्धकाल तक सीमित नहीं है. चार विमानों और छोटे दल से शुरू हुआ संगठन आगे चलकर आधुनिक सैन्य बल बना. इस सफर के पीछे कई पीढ़ियों के वायु सैनिकों का प्रशिक्षण, अनुशासन और सेवा है.
छोटी शुरुआत, लेकिन सफर लंबा
भारतीय वायुसेना की शुरुआती कहानी हमें उसके विकास की गति दिखाती है. 1932 में स्थापना हुई. 1933 में पहला स्क्वाड्रन बना. दूसरे विश्वयुद्ध में उसने अनुभव हासिल किया. स्वतंत्रता के बाद उसने नए भारत की वायुसेना के रूप में अपनी पहचान बनाई. 1950 में रॉयल शब्द हटने के बाद उसका नाम आज के रूप में आया. वायुसेना दिवस इसी इतिहास को याद करने का अवसर है. यह दिन उन लोगों के योगदान को सम्मान देता है जिन्होंने सीमित साधनों से शुरुआत की और आगे के विकास की नींव रखी. चार विमानों, छह अफसरों और 19 वायुसैनिकों से शुरू हुआ सफर आज भी बदलती जरूरतों के साथ आगे बढ़ रहा है.



