छात्र आंदोलन पर बोले—मांगों को दबाने के बजाय समाधान निकालना जरूरी, सीईसी विवाद पर भी रखी अपनी बात
नई दिल्ली। छात्र आंदोलनों को लेकर चल रही बहस के बीच जोशी ने कहा कि बच्चों और छात्रों की मांगों को डंडे के बल पर दबाना उचित तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुनकर संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश होनी चाहिए।
उन्होंने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। देश के विभिन्न हिस्सों में हाल के दिनों में छात्र संगठनों और अन्य समूहों ने कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए हैं।
सीईसी विवाद पर भी रखी बात
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी विवाद जारी है। विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों की ओर से उनके इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन किए जा चुके हैं। विवाद के केंद्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल हैं।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। ऐसे में पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस लगातार जारी है।
10 अक्टूबर को फिर प्रस्तावित प्रदर्शन
सीईसी विवाद को लेकर छात्र संगठन भी सक्रिय हैं। आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतरमंतर पर विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। संगठन की ओर से सीईसी के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण को वापस लेने समेत कई मांगें रखी गई हैं।
जोशी के बयान के बाद छात्र आंदोलनों से निपटने के तरीके और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।



