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नाना पाटेकर का ‘असली’ नाम क्या था? बचपन में मिला था ‘नाना’ नाम, ऐसे बनी यही उनकी पहचान:

नाना पाटेकर का ‘असली’ नाम क्या था? बचपन में मिला था ‘नाना’ नाम, ऐसे बनी यही उनकी पहचान:

गोवा: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। अस्पताल ले जाने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।

नाना पाटेकर ने अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली आवाज और अलग अंदाज से सिनेमा में खास पहचान बनाई। ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘प्रहार’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस नाम से उन्हें पूरी दुनिया जानती थी, वह उनका जन्म के समय रखा गया नाम नहीं था?

विश्वनाथ पाटेकर था उनका असली नाम

नाना पाटेकर का पूरा नाम विश्वनाथ दीनकर पाटेकर था। आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनका नाम इसी रूप में दर्ज रहा है और इसके साथ ‘नाना पाटेकर’ नाम से उनकी सार्वजनिक पहचान बनी।

उनके नाम को लेकर खुद नाना पाटेकर ने भी एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘नाना’ कोई बाद में अपनाया गया फिल्मी नाम नहीं था। उन्होंने कहा था कि बचपन से ही उनका नाम नाना था और उनके पासपोर्ट पर भी यही नाम दर्ज था।

बचपन में ऐसे पड़ा ‘नाना’ नाम

नाना नाम उनके बचपन से ही उनके साथ जुड़ गया था। परिवार और करीबियों के बीच उन्हें इसी नाम से पुकारा जाने लगा। धीरे-धीरे यह नाम इतना प्रचलित हो गया कि आगे चलकर यही उनकी सार्वजनिक और फिल्मी पहचान बन गया।

उनके पुराने परिचित उन्हें कभी-कभी ‘विशू’ जैसे नाम से भी जानते थे। नाना पाटेकर ने बताया था कि जब कोई उन्हें विश्वनाथ या विशू कहकर बुलाता था तो उन्हें अंदाजा हो जाता था कि सामने वाला उनके पुराने दौर का परिचित है। बाकी लोगों के लिए वह हमेशा ‘नाना’ ही रहे।

थिएटर से शुरू हुआ था अभिनय का सफर

नाना पाटेकर ने अभिनय की दुनिया में सीधे फिल्मों से शुरुआत नहीं की थी। उनका जुड़ाव थिएटर से रहा और इसके बाद 1978 में फिल्म ‘गमन’ के जरिए उन्होंने सिनेमा में कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में कई बेहद प्रभावशाली किरदार निभाए।

‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। वहीं ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का किरदार उनके करियर के सबसे लोकप्रिय किरदारों में शामिल हो गया।

तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित

नाना पाटेकर को अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। उन्हें 2013 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।

उनका अभिनय सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित नहीं रहा। मराठी सिनेमा और थिएटर में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य और नकारात्मक किरदारों तक, उन्होंने अलग-अलग तरह के चरित्रों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से निभाया।

‘नाना’ नाम ही बन गया उनकी पहचान

फिल्मी दुनिया में आने के बाद विश्वनाथ पाटेकर के बजाय ‘नाना पाटेकर’ नाम ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। यह नाम इतना लोकप्रिय हुआ कि आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें इसी नाम से जानने लगीं।

इस तरह ‘नाना’ उनके लिए सिर्फ एक उपनाम नहीं रहा, बल्कि वही नाम उनकी दशकों लंबी फिल्मी यात्रा और दर्शकों की यादों का हिस्सा बन गया। 75 साल की उम्र में उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय शैली की अलग पहचान थी।

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