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बार-बार पेनकिलर और एंटीबायोटिक: लेने से किडनी पर पड़ सकता है असर, इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत.

बार-बार पेनकिलर और एंटीबायोटिक: लेने से किडनी पर पड़ सकता है असर, इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत.

सिरदर्द, बदन दर्द या हल्का बुखार होने पर कई लोग बिना डॉक्टर से सलाह लिए पेनकिलर या एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। कभी-कभार सही दवा का इस्तेमाल आमतौर पर बड़ी समस्या नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा दवाओं का सेवन कुछ लोगों में किडनी समेत शरीर के दूसरे अंगों पर नुकसान का जोखिम बढ़ा सकता है।

खासकर कुछ दर्द निवारक दवाएं, जैसे NSAIDs, किडनी में रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं कुछ एंटीबायोटिक्स भी कुछ परिस्थितियों में किडनी पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। इसलिए इन दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना जरूरी है।

पेनकिलर किडनी को कैसे प्रभावित कर सकती है?

किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर में पानी व खनिजों का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। कुछ पेनकिलर, खासकर NSAIDs, किडनी में रक्त प्रवाह को कम कर सकती हैं। इससे कुछ लोगों में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।

किडनी को नुकसान की खास बात यह है कि शुरुआती चरण में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। समस्या का पता कभी-कभी ब्लड टेस्ट में क्रिएटिनिन बढ़ने के बाद चलता है।

कितनी बार पेनकिलर लेना जोखिम बढ़ा सकता है?

अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभार थोड़े समय के लिए डॉक्टर या दवा के निर्देश के अनुसार पेनकिलर लेता है तो जोखिम आमतौर पर कम होता है। लेकिन लंबे समय तक या बार-बार खुद से दवा लेने पर खतरा बढ़ सकता है।

डिहाइड्रेशन, अधिक उम्र, पहले से किडनी की समस्या और कुछ अन्य बीमारियां इस जोखिम को और बढ़ा सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लगातार या बार-बार दर्द के लिए पेनकिलर की जरूरत पड़ रही है, तो दर्द की वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है नुकसानदायक

हर बुखार या संक्रमण में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। खासकर वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक आमतौर पर काम नहीं करतीं। इसके बावजूद कई लोग सर्दी-जुकाम या वायरल बीमारी में खुद से एंटीब

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