क्या आपका बैंक किसी काम को तय समय के भीतर पूरा नहीं कर रहा है? अगर हां, तो कुछ मामलों में आपको बैंक से मुआवजा मिल सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक ने अलगअलग बैंकिंग सेवाओं के लिए समय सीमा तय की है. अगर बैंक उस समय सीमा के बाद भी काम पूरा करता है, तो कुछ मामलों में ग्राहक को हर दिन के हिसाब से मुआवजा देने का नियम है. यह रकम 100 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रतिदिन तक हो सकती है.

वित्तीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, RBI का मुआवजे का सिस्टम तय समय सीमा पर आधारित है. यानी किसी बैंकिंग सेवा के लिए एक समय सीमा तय है और बैंक उससे ज्यादा समय लेता है तो संबंधित नियम के तहत ग्राहक को रोजाना मुआवजा मिल सकता है.
1. UPI, ATM या डिजिटल पेमेंट फेल होने पर
अगर आपने UPI, ATM, कार्ड या किसी दूसरे डिजिटल माध्यम से पेमेंट किया और पैसा आपके खाते से कट गया, लेकिन ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हुआ, तो बैंक को इसे तय समय में ठीक करना होता है. RBI के नियमों के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में बैंक को T+1 या T+5 दिन के भीतर पैसा वापस करना होता है. अगर बैंक तय समय के बाद भी पैसा वापस नहीं करता है, तो 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना पड़ सकता है. कई मामलों में यह मुआवजा बैंक को ग्राहक के अलग से मांग किए बिना देना होता है. हालांकि, बिना अनुमति वाले ट्रांजैक्शन के मामलों में ग्राहक की जिम्मेदारी परिस्थितियों पर निर्भर करती है. इसलिए ऐसे मामलों में मुआवजे के नियम अलग हो सकते हैं.
2. क्रेडिट कार्ड बंद करने में देरी
अगर आप अपना क्रेडिट कार्ड बंद करवाना चाहते हैं, तो बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनी को आपकी रिक्वेस्ट 7 कामकाजी दिनों के भीतर पूरी करनी होती है. अगर बैंक तय समय में कार्ड बंद नहीं करता है, तो उसे 500 रुपये प्रति कैलेंडर दिन के हिसाब से मुआवजा देना पड़ सकता है. यह रकम तब तक लागू हो सकती है, जब तक कार्ड अकाउंट बंद नहीं हो जाता.
3. लोन चुकाने के बाद प्रॉपर्टी के कागज लौटाने में देरी
अगर आपने अपना होम लोन या कोई अन्य लोन पूरी तरह चुका दिया है, तो बैंक या लोन देने वाली संस्था को आपके मूल प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट 30 दिनों के भीतर वापस करने होते हैं. अगर कागज लौटाने में देरी बैंक की वजह से होती है, तो RBI के नियमों के अनुसार बैंक को 5,000 रुपये प्रति दिन का मुआवजा देना होता है. अगर बैंक के पास रखे दस्तावेज खो जाते हैं या खराब हो जाते हैं, तो बैंक को डुप्लीकेट कॉपी हासिल करने में भी मदद करनी होगी और उससे जुड़ी लागत उठानी होगी.
4. क्रेडिट रिपोर्ट में गलती सुधारने में देरी
अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में कोई गलत जानकारी है और आपने बैंक या संबंधित संस्था के सामने इसकी शिकायत की है, तो इसे तय समय में ठीक करना जरूरी है. क्रेडिट रिपोर्ट से जुड़ी शिकायत को 30 दिनों के भीतर हल किया जाना चाहिए. अगर बैंक तय समय में शिकायत का समाधान नहीं करता है, तो ग्राहक को 100 रुपये प्रति कैलेंडर दिन के हिसाब से मुआवजा मिल सकता है. इसलिए अगर क्रेडिट रिपोर्ट में गलत लोन, गलत बकाया या किसी दूसरे खाते से जुड़ी जानकारी दिखाई दे रही है, तो शिकायत की तारीख और उससे जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी है.
5. बैंक लॉकर में सामान का नुकसान
बैंक लॉकर में चोरी, आग, धोखाधड़ी या बैंक की लापरवाही की वजह से सामान का नुकसान होने पर भी RBI के नियमों के तहत बैंक की जिम्मेदारी तय है. ऐसे मामले में बैंक की अधिकतम देनदारी लॉकर के सालाना किराये की 100 गुना रकम तक हो सकती है. उदाहरण के लिए, अगर लॉकर का सालाना किराया 3,000 रुपये है, तो नियम के अनुसार अधिकतम देनदारी 3 लाख रुपये तक हो सकती है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि लॉकर में रखे सामान के नुकसान की भरपाई का दावा परिस्थितियों और RBI के लागू नियमों के आधार पर तय होता है.



