
चूरू: राजस्थान के चूरू जिले में एक साधु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उनके शव को परिजनों को सूचना दिए बिना समाधि दिए जाने का मामला सामने आया है। परिवार की शिकायत और विरोध के बाद पुलिस ने करीब 50 घंटे बाद समाधि से शव बाहर निकलवाया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने छह नामजद लोगों सहित अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
आश्रम में दो साधुओं के बीच हुआ था विवाद
मृतक की पहचान बन्नानाथ के रूप में हुई है। उनके बड़े भाई हंसराज हरियाणा के सिरसा के निवासी हैं। हंसराज के अनुसार, बन्नानाथ वर्ष 2024 में साधु बने थे और पिछले करीब दो वर्षों से चूरू जिले के सांगासर गांव स्थित संत बालकनाथ के आश्रम में रह रहे थे।
परिजनों को जानकारी मिली थी कि सोमवार को आश्रम में बालकनाथ और बन्नानाथ के बीच मारपीट हुई थी। आरोप है कि इस घटना के दौरान बन्नानाथ की मौत हो गई। इसके बाद परिवार को सूचना दिए बिना ही उनके शव को समाधि दे दी गई।
सूचना मिलने पर आश्रम पहुंचे परिजन
परिवार के मुताबिक, आश्रम से जुड़े एक व्यक्ति से जानकारी मिलने के बाद हंसराज मंगलवार को वहां पहुंचे। बुधवार को आश्रम प्रबंधन ने बन्नानाथ की मौत की बात स्वीकार की, लेकिन परिजनों को मौत का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। इसके बाद मामले को लेकर विवाद बढ़ गया और परिवार ने पुलिस से शिकायत की।
करीब 50 घंटे बाद समाधि से निकाला गया शव
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तहसीलदार अंकित मिमानी की मौजूदगी में गुरुवार को समाधि से शव बाहर निकलवाया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिवार को सौंप दिया गया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर छह नामजद लोगों सहित अन्य के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
दो लोग हिरासत में, जांच जारी
पुलिस ने मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है। अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आश्रम में वास्तव में क्या हुआ था, बन्नानाथ की मौत किन परिस्थितियों में हुई और शव को परिजनों को जानकारी दिए बिना समाधि क्यों दी गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और परिजनों की शिकायत पर आधारित है। हत्या से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



