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शेयर बाजार में जोरदार उछाल, 12 अक्टूबर को कैसी रहेगी बाजार की चाल? निफ्टी के सामने 22,600 का अहम स्तर.

शेयर बाजार में जोरदार उछाल, 12 अक्टूबर को कैसी रहेगी बाजार की चाल? निफ्टी के सामने 22,600 का अहम स्तर.

शेयर बाजार आउटलुक: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। हालिया गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी रिकवरी दर्ज की गई। आईटी, एफएमसीजी और सरकारी बैंकों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्र में बाजार की दिशा कई अहम स्तरों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार तेजी

शुक्रवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 879 अंक यानी 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472 अंक पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 289 अंक यानी 1.30 प्रतिशत चढ़कर 22,520 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में तेजी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2,344 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,686 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टर के लिहाज से आईटी शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इस क्षेत्र में 3.02 प्रतिशत की तेजी आई। एफएमसीजी सेक्टर में 2.25 प्रतिशत और सरकारी बैंकों के शेयरों में 1.62 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप शेयर 1.46 प्रतिशत और स्मॉलकैप शेयर 0.55 प्रतिशत चढ़े। बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाले इंडिया वीआईएक्स में भी 6.09 प्रतिशत की गिरावट आई। टीसीएस, आईटीसी और अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयरों में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली।

खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग से बाजार को मिला सहारा

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, हाल में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की। इसके साथ ही शॉर्ट कवरिंग ने भी बाजार की तेजी को समर्थन दिया। कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों की शुरुआत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़ी कारोबारी संभावनाओं के कारण आईटी शेयरों में खास दिलचस्पी दिखाई दी।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भू-राजनीतिक चिंताओं में कमी से भी निवेशकों की धारणा में सुधार हुआ। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। निवेशकों की नजर अब घरेलू महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।

निफ्टी के लिए 22,600 का स्तर क्यों है अहम?

एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे के अनुसार, निफ्टी में अच्छी रिकवरी जरूर आई है, लेकिन इंडेक्स 22,600 के आसपास मौजूद 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के स्तर को पार नहीं कर पाया।

उनके मुताबिक, अगर निफ्टी 22,600 से 22,650 के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो बाजार में रिकवरी आगे बढ़ सकती है। इसके विपरीत, इस स्तर को पार करने में नाकाम रहने पर दोबारा कमजोरी देखने को मिल सकती है।

निफ्टी के लिए 22,450, 22,350 और 22,100 के स्तर अहम सपोर्ट माने जा रहे हैं। निवेशकों को इन स्तरों के साथ बाजार में आने वाली नई हलचल पर भी नजर रखनी होगी।

बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव की आशंका

360 वन वेल्थ की अध्यक्ष अनु जैन ने बाजार की लंबी अवधि की तकनीकी स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, बाजार का 200-सप्ताह के मूविंग एवरेज से नीचे आना कमजोरी का संकेत हो सकता है। ऐसे में बाजार में कुछ समय तक और गिरावट या सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है।

बजाज ऑल्ट्स की निवेश प्रमुख लक्ष्मी अय्यर का मानना है कि पहले आई असामान्य तेजी के बाद बाजार में सुधार की प्रक्रिया जारी है। निवेशकों को मजबूत स्थिति लौटने से पहले उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए संकेत दिया कि बेहतर अवसर सामने आने से पहले बाजार को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ सकता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सोच-समझकर निवेश जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार के सभी हिस्सों में वैल्यूएशन अभी आकर्षक नहीं हैं। बड़े शेयरों यानी लार्जकैप में मूल्यांकन अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दे रहा है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अब भी सावधानी बरतने की जरूरत है।

लक्ष्मी अय्यर के अनुसार, मिडकैप शेयर लार्जकैप की तुलना में लगभग 55 से 60 प्रतिशत प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। स्मॉलकैप शेयरों में भी इसी तरह का प्रीमियम देखा जा रहा है। हालांकि, कुछ मध्यम आकार की कंपनियों की कमाई मजबूत बनी हुई है। इसलिए मौजूदा बाजार में बिना विश्लेषण के खरीदारी करने के बजाय कंपनियों की वित्तीय स्थिति और मूल्यांकन को देखकर निवेश करना अहम हो सकता है।

विदेशी निवेशकों की नजर में भारत की स्थिति

नुवामा एसेट मैनेजमेंट के अध्यक्ष अंशु कपूर के अनुसार, वैश्विक निवेशकों को फिलहाल दूसरे बाजारों में तुलनात्मक रूप से बेहतर अवसर दिखाई दे रहे हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारतीय बाजार का दीर्घकालिक आकर्षण समाप्त हो गया है, लेकिन निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

12 अक्टूबर को बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?

12 अक्टूबर को बाजार की दिशा समझने के लिए निवेशकों को कुछ प्रमुख संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए:

  • निफ्टी का रेजिस्टेंस: 22,600 से 22,650 के स्तर के ऊपर टिकना तेजी को मजबूती दे सकता है।
  • महंगाई के आंकड़े: घरेलू सीपीआई आंकड़े ब्याज दरों और बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
  • कंपनियों के नतीजे: दूसरी तिमाही के परिणामों से शेयरों की चाल प्रभावित हो सकती है।
  • विदेशी निवेशकों की गतिविधियां: एफआईआई की खरीदारी या बिकवाली बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
  • वैश्विक संकेत: कच्चे तेल की कीमतें, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार पर असर डाल सकते हैं।

कुल मिलाकर, शुक्रवार की तेजी से बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन इसे मजबूत तेजी की शुरुआत मानने से पहले निफ्टी के अहम प्रतिरोध स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा। निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय जोखिम, मूल्यांकन और अपनी निवेश अवधि को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह लेख बाजार से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है। इसे निवेश की सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश का कोई भी निर्णय लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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